मेरठ में जैसे-जैसे आधुनिकता का रंग चढ़ता गया, जिम्मेदार पुरानी व्यवस्थाओं को नजरंदाज करते चले गए। यही कारण है कि शहर में दर्जनों हाइड्रेंट जमीन के नीचे दबा दिए गए। उनके स्थान निर्धारित होने के बाद भी नगर निगम उनको तलाश नहीं पा रहा है।
जनपद के 18 थाना क्षेत्रों में 132 फायर हाइड्रेंट लगे हैं। सबसे ज्यादा हाइड्रेंट कोतवाली (36) और देहलीगेट (19) में हैं। ये क्षेत्र शहर के सबसे पुराने इलाकों में शुमार हैं। यहां के संकरे रास्तों को देखकर लगता है फायर हाइड्रेंट की शुरुआत यहीं से हुई होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दशकों पहले इनका महत्व समझा गया तो आज क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में आज भी दमकल गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है।
कोतवाली और देहलीगेट में दबे हाइड्रेंट
भाटवाड़ा, बीरुकुआं सुभाष बाजार, गुदड़ी बाजार चौक, आबकारी गोदाम हापुड़ अड्डा, स्वामीपाड़ा, मोहल्ला नाकराम, मोहल्ला गौरीपाड़ा भरी सराय, मोहल्ला बनी सराय मस्जिद के कोने पर, स्वामीपाड़ा फूटा कुआं, खारा कुआं, मोहल्ला जाटियान, मोहल्ला डालमपाड़ा, ठठेड़वाड़ा चर्च, पूर्वा फैय्याजयान, मोहल्ला करम अली, राजपूतान मस्जिद के पास, सराय वैली तैली वाली मस्जिद, लाला का बाजार, देहलीगेट पुलिस चौकी के सामने, देहलीगेट सर्विस शक्ति स्टेशन, मेनका टाकीज के पास, अप्सरा टाकीज के पास और एसपी सिटी दफ्तर के पास।
कोई संपर्क नहीं किया गया
दमकल विभाग ने कोई संपर्क नहीं किया है। अगर मदद मांगी जाती है तो नगर निगम पूर्ण सहयोग करेगा। फायर हाइड्रेंट सक्रिय रहेंगे तो आग की घटनाओं से जुड़े मामले में लाभ होगा।
-यशवंत कुमार, मुख्य अभियंता (निर्माण), नगर निगम
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