मेरठ जिले का हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग, कुश्ती, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों का विशेष नाता रहा। क्रिकेट में जहां प्रवीण कुमार, भुवनेश्वर कुमार, कर्ण शर्मा, प्रियम गर्ग, समीर रिजवी, पूर्णांक त्यागी जैसे क्रिकेटर दिए हैं तो कुश्ती में मेरठ की इकलौती अर्जुन अवॉर्डी और कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक विजेता अलका तोमर जैसी खिलाड़ी दी।
शूटिंग में 16 वर्षीय सौरभ चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीते। वहीं डिस्कस थ्रोअर सीमा पूनिया अपना डंका विश्व स्तर पर बजा चुकी हैं। खेल दिवस के मौके पर मेरठ की एथलीट पारुल व प्रियंका ने राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में एक ही दिन में दो पदक हासिल किए।
एनएएस के मैदान से प्रशिक्षण लेकर हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया भारतीय महिला हॉकी टीम तक पहुंची। जहां उनको भारतीय हॉकी टीम का कप्तान चुना गया। वंदना के निर्देशन में भारतीय टीम ने रियो ओलंपिक 2016 में भाग लिया। वो कई राष्ट्रीय स्तर पर टीम को पदक दिला चुकी हैं।
मेरठ की बहू सीमा पूनिया ने डिस्कस थ्रो में कॉमनवेल्थ व एशियन खेलो में देश का परचम लहराया। मूल रूप से मुजफ्फरनगर निवासी दिव्या काकरान ने मेरठ सीसीएसयू से पढ़ाई की। उन्होंने मेरठ में रहकर कुश्ती के गुर सीखे। 2018 में दिव्या काकरान ने महत्वपूर्ण पदक जीते। इसमें गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक, एशियन गेम्स में कांस्य, जबकि एशियन चैंपियनशिप में कई पदक हासिल किए।
एनएएस के मैदान से निकली शिवानी शर्मा राष्ट्रीय स्तर पर शानदार खिलाड़ी रहीं, जबकि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय अंपयार बनकर हॉकी खेल को नई ऊर्जा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर टीम को कई बार पदक दिलाए। युवा खिलाड़ी उनको अपना आदर्श मानते हैं। ममता यादव हॉकी में महाराष्ट्र टीम की कप्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं।
एनएएस मैदान पर गोल दागने वाली खिलाड़ी मेरठ का नाम रोशन कर रही है। भारतीय हॉकी टीम में जाने को ममता उत्सुक हैं। किसान जगमोहन के 16 वर्षीय बेटे सौरभ ने वो कर दिखाया जो बडे़-बडे़ दिग्गज नहीं कर पाए। ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया। एशियन गेम्स, यूथ ओलंपिक गेम्स, आईएसएसएफ विश्व कप में लगातार स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको सम्मानित किया।