छिड़काव पर खर्च कर दिए लाखों, मच्छर तक मरे नहीं
बिजनौर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नगर पालिका बिजनौर क्षेत्र में अब तक सैनिटाइजेशन और फॉगिंग पर साढ़े सात लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए गए हैं। बावजूद मच्छरों तक से निजात नहीं मिल पाई है। हर वार्ड में तीन तीन बार फॉगिंग होने के बाद भी मच्छरों का प्रकोप बना हुआ है।
शहर और ग्राम पंचायतों में सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। ताकि कोरोना संक्रमण के खतरे से बचा जा सके। नगर पालिका बिजनौर में तो सैनिटाइजेशन टनल भी लगाई गई है। वार्डों में सैनिटाइजेशन के साथ ही मच्छरों को खत्म करने के लिए भी कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। रोजाना चार से पांच वार्डों में छिड़काव किया जाता है। हर वार्ड में तीन-तीन बार छिड़काव किया जा रहा है। ताज्जुब है कि छिड़काव से कोरोना वायरस खत्म होने का पता नहीं चलता है लेकिन सैनिटाइजर और छिड़काव में प्रयोग कीटनाशक मच्छरों पर भी बेअसर साबित हो रहे हैं।
- हैंडवॉश और छिड़काव के सैनिटाइजर में अंतर
कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए छिड़काव करने और हैंडवॉश वाला सैनिटाइजर अलग अलग होता है। हालांकि दोनों में सोडियम हाइपोक्लोराइड का इस्तेमाल किया जा रहा है। हैंडवॉश वाले सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा 70 प्रतिशत तक होती है। जबकि छिड़काव वाले सैनिटाइजर में दस से 12 प्रतिशत।
- क्या है सैनिटाइजर
जीआईसी बिजनौर के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता मोहम्मद मारूफ ने बताया कि सैनिटाइजर मिथाइल एल्कोहल, हाईड्रोजन पराक्साइड तथा ग्लिसरोल प्रयुक्त होता है। मिथाइल अल्कोहल कीटनाशक है। हाईड्रोजन पराक्साइड एंटीसेप्टिक है। मिथाइल अल्कोहल आर्गेनिक यौगिक है, जो वाष्पशील होता है।
- इतनी दवाई हुई खर्च
नगर पालिका ने नगर में 400 लीटर सैनिटाइजर का छिड़काव करा दिया है। इसके अलावा मच्छरों को खत्म करने के लिए 200 लीटर दवाई का छिड़काव फॉगिंग में और 200 लीटर ही मच्छर का लार्वा खत्म करने की दवा का इस्तेमाल किया जा चुका है। सैनिटाइजर की कीमत 80 रुपये लीटर, मच्छर के लार्वा खत्म करने की दवाई 1200 रुपये लीटर और फॉगिंग में इस्तेमाल होने वाली दवाई 2500 रुपये प्रति लीटर मिलती है।
कोट-
- लगातार कर रहे हैं छिड़काव
नगर पालिका क्षेत्र में मच्छर पहले से कम हैं। क्षेत्र में लगातार सैनिटाइजर व अन्य कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। हर वार्ड में तीन तीन बार छिड़काव किया जा चुका है। अब भी लगातार छिड़काव कराया जा रहा है। - गोविंद चौधरी, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका