‘क्या बात हुई क्या गरज पड़ी, ये रंग-ए-जहां बदला कैसा
मगरूरों का मजलूमों में सर रखना कैसा
हिंदू कैसा, मुस्लिम कैसा, ब्राह्मण कैसा, बनिया कैसा
हम वोट शाहनवाज को देंगे, हम वोट शाहनवाज को देंगे’
1952 में जब देश में लोकतंत्र की कोपलें फूट रहीं थीं तो भारत माता के सिपेहसालार जनरल शाहनवाज खान को मेरठ ने सिर आंखों पर बिठाया। पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जनरल शाहनवाज खान मेरठ के पहले सांसद बने। 1952 से 1971 तक लगातार चार बार सांसद चुने गए। जिस शहर की गली-गली में कभी शाहनवाज का नाम गूंजता था। आजाद हिंद फौज के पहले मेजर जनरल आज मेरठ में ही गुमनाम हैं।