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नवरात्र पर विशेष खबर: बेटियों को लेकर सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

Tue, 09 Oct 2018 08:55 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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नवरात्र - फोटो : SELF
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कल से नवरात्र शुरू हो जाएंगे। अगले नौ दिन तक सभी मां दुर्गा की पूजा में लीन दिखाई देंगे। बेटियों को मां दुर्गा का रूप मानकर उनकी पूजा करेंगे। लेकिन इस धार्मिक पक्ष से अलग भी एक तस्वीर सामने आ रही है। जिले में प्रति एक हजार लड़कों पर बेटियों का अनुपात केवल 917 ही है। इससे भी डरावना पहलू ये है कि छह साल तक आते आते एक हजार बेटों पर केवल 800 बेटियां ही रह जाती है। 

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बेटी है तो कल है। बेटी के बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। बेटियों को बचाने व पढ़ाने के लिए सरकारी व सामाजिक स्तर पर अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बेटियों को बचाने के लिए अब केवल सामाजिक अभियान ही काफी नहीं है। इस अभियान को अब आंदोलन बनाना होगा। 2011 की जिले की जनगणना के अनुसार जिले में बेटियों का लिंगानुपात प्रति एक हजार लड़कों पर 917 था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा कराए गए एक सर्वे में और भयावह आंकड़े सामने आए हैं। जिले में छह साल तक आते आते 917 में से 117 बेटियां दम तोड़ जाती हैं। छह साल तक बेटियों का लिंगानुपात जिले में 800 ही रह जाता है। यानि छह साल तक होते होते एक हजार बेटों पर जिले में केवल 800 बेटियां ही जीवित रहती हैं। चाहे जो भी वजह हो, 917 में से 117 बेटियां छह साल तक होते होते काल के गाल में समा जाती हैं। बेटियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान भी चलाया जा रहा है। जिले में भयावह लिंगानुपात को देखते हुए जिले को भी इस योजना में शामिल किया गया है। 

ये होगा काम
बेटियों को बचाना सभी का दायित्व है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में बेटियों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बेटियों के पैदा होने पर उत्सव मनाए जाएंगे। कोई तारीख तय कर अस्पतालों, गांवों आदि में उत्सव का आयोजन किया जाएगा। किसी महीने में किसी अस्पताल या गांव में जितनी भी परिवारों में बेटी हुई हैं, उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा।

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रंग ला रही मुहिम
पिछले कुछ सालों में बेटियों को बचाने के लिए चलाई जा रही मुहिम के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पहले जिले में प्रति एक हजार बेटों पर बेटियों का अनुपात 882 था। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जागरूकता अभियान के असर के चलते 2017 में बेटियों का अनुपात प्रति एक हजार बेटों पर 920 बेटी तक पहुंच गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार के अनुसार बेटी ईश्वर का वरदान है। बेटी के बिना कोई समाज नहीं है। जिलेवासी बेटियों के जन्म को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर स्वीकार करें। बेटियों को बचाने और पढ़ाने में सभी सहयोग दें। बेटी बचाने के अभियान में हर परिवार को जोड़ा जाएगा। ओडीएफ अभियान में जिले को अभूतपूर्व कामयाबी मिली है। इस अभियान में लगने वाली टीम को भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में लगाया जाएगा। ओडीएफ अभियान में अधिकारियों को गांव गोद दिए गए थे। इसके अलावा कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। 

वर्ष              बेटे        बेटी 
2015-16    1000        894 
2016-17    1000        882 
2017-18    1000        920 
नोट: उक्त आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर आधारित है। ये आंकड़े अस्पतालों में हुए प्रसव पर आधारित हैं।

पालिका     पुरूष        महिलाए    लिंगानुपात 
बिजनौर    49055        44242        901 
नजीबाबाद    46372        42163        909 
नगीना        49890    45356        909 
शेरकोट    32369    29857        922 
किरतपुर    31999    29947        935 
स्योहारा    28065    25231        890 
धामपुर    26608    24389    916 
नहटौर        24947        22887        917 
हल्दौर        10245        9322        909 
अफजलगढ़    15215        13886    912 
नूरपुर        20044        18762        936 
चांदपुर    43354        40087    924 
नगर पंचायत 
झालू        10893    10085    925 
मंडावर    11119        9959        895 
सहसपुर    12822        11641        907 
साहनपुर    11303    10336    937 
जलालाबाद    10600    9760        920 
बढ़ापुर        11911        11545        969 
 
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ब्लॉक 
नजीबाबाद    180610    164680    911 
किरतपुर    91787        83978    911 
देवमल    136295    122387    897 
खारी        120486    108316    898 
कोतवाली    186909    174921    935 
अफजलगढ़    123199    113265    919 
नहटौर        101888    94819    930 
अल्लैहपुर    120861    111786    924 
बूढ़नपुर    95117        86972    913 
जलीलपुर    131322    119643    911 
नूरपुर        150050    138367    922 

बेटियों को प्यारा बढ़ापुर 
जिले में सबसे ज्यादा छोटे से कस्बे बढ़ापुर में एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या 969 है। सबसे कम लिंगानुपात स्योहारा में है। यहां पर बेटियों का लिंगानुपात केवल 890 ही है। 

बेटियों को बचाने के लिए महिलाओं से ज्यादा जागरूकता पुरुषों में लाई होगी। उन्हें बताया जाएगा कि हर बेटी के भाग्य में पिता होता है, लेकिन हर पिता के भाग्य में बेटी क्यों नहीं है। बेटियों का पिता बन पिताओं को भाग्यशाली होने के बारे में जागरूक किया जाएगा।

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