रंग ला रही मुहिम
पिछले कुछ सालों में बेटियों को बचाने के लिए चलाई जा रही मुहिम के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। पहले जिले में प्रति एक हजार बेटों पर बेटियों का अनुपात 882 था। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जागरूकता अभियान के असर के चलते 2017 में बेटियों का अनुपात प्रति एक हजार बेटों पर 920 बेटी तक पहुंच गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार के अनुसार बेटी ईश्वर का वरदान है। बेटी के बिना कोई समाज नहीं है। जिलेवासी बेटियों के जन्म को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर स्वीकार करें। बेटियों को बचाने और पढ़ाने में सभी सहयोग दें। बेटी बचाने के अभियान में हर परिवार को जोड़ा जाएगा। ओडीएफ अभियान में जिले को अभूतपूर्व कामयाबी मिली है। इस अभियान में लगने वाली टीम को भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में लगाया जाएगा। ओडीएफ अभियान में अधिकारियों को गांव गोद दिए गए थे। इसके अलावा कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई थी।
वर्ष बेटे बेटी
2015-16 1000 894
2016-17 1000 882
2017-18 1000 920
नोट: उक्त आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर आधारित है। ये आंकड़े अस्पतालों में हुए प्रसव पर आधारित हैं।
पालिका पुरूष महिलाए लिंगानुपात
बिजनौर 49055 44242 901
नजीबाबाद 46372 42163 909
नगीना 49890 45356 909
शेरकोट 32369 29857 922
किरतपुर 31999 29947 935
स्योहारा 28065 25231 890
धामपुर 26608 24389 916
नहटौर 24947 22887 917
हल्दौर 10245 9322 909
अफजलगढ़ 15215 13886 912
नूरपुर 20044 18762 936
चांदपुर 43354 40087 924
नगर पंचायत
झालू 10893 10085 925
मंडावर 11119 9959 895
सहसपुर 12822 11641 907
साहनपुर 11303 10336 937
जलालाबाद 10600 9760 920
बढ़ापुर 11911 11545 969
ब्लॉक
नजीबाबाद 180610 164680 911
किरतपुर 91787 83978 911
देवमल 136295 122387 897
खारी 120486 108316 898
कोतवाली 186909 174921 935
अफजलगढ़ 123199 113265 919
नहटौर 101888 94819 930
अल्लैहपुर 120861 111786 924
बूढ़नपुर 95117 86972 913
जलीलपुर 131322 119643 911
नूरपुर 150050 138367 922
बेटियों को प्यारा बढ़ापुर
जिले में सबसे ज्यादा छोटे से कस्बे बढ़ापुर में एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या 969 है। सबसे कम लिंगानुपात स्योहारा में है। यहां पर बेटियों का लिंगानुपात केवल 890 ही है।
बेटियों को बचाने के लिए महिलाओं से ज्यादा जागरूकता पुरुषों में लाई होगी। उन्हें बताया जाएगा कि हर बेटी के भाग्य में पिता होता है, लेकिन हर पिता के भाग्य में बेटी क्यों नहीं है। बेटियों का पिता बन पिताओं को भाग्यशाली होने के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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