फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्पेशल 26 की तर्ज पर चंदन बिहारी का गैंग

Fri, 02 Sep 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
विज्ञापन
रिलायंस कंपनी के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
चंदन बिहारी का गैंग ने चर्चित फिल्म स्पेशल 26 की याद दिला दी। उस फिल्म में जैसे अक्षय कुमार फर्जी आयकर अधिकारी बनकर अपनी टीम के साथ असली डकैती डालता था। उसी तरह चंदन भी अपने साथियों के साथ रिलायंस कंपनी का फर्जी अफसर बनकर 4-जी टावर के करोड़ों रुपये कीमत के अत्याधुनिक उपकरण लूटता था।
विज्ञापन

पुलिस ने पूछताछ में बताया कि चंदन रिलायंस जियो के 4-जी टावर को लूटने के लिए पूरी रैकी करता था। इसमें कंपनी के भी कुछ कर्मचारी उसका सहयोग करते थे। चंदन और उसके साथी पूरी प्लानिंग बनाकर जब टावर पर पहुंचते थे तो उनका रुतबा अलग ही होता था। कोट पेंट, लेदर शूज, लग्जरी गाड़ी और हाथों में फाइल। टावर पर पहुंचते ही चंदन गाड़ी में बैठे-बैठे ही गार्ड को बुलाता था। कुछ सवाल-जवाब के बाद गाड़ी से उतरकर पहले गार्ड को ही प्रभाव में लेता था। गार्ड की यूनिफार्म और जूते को देखकर चिल्लाते हुए कहता था कि ‘मैंने कहा था ना कि ऐसे गार्ड मत रखो’। इतनी बड़ी कंपनी में ऐसे गार्डों से नौकरी करवाओगे? इतना सुनते ही गार्ड के तो नौकरी जाने के ख्याल से ही होश फाख्ता हो जाते थे। गैंग के दो सदस्य गार्ड को समझाने की बात कहकर अंदर ले जाते थे और बंधक बना लेते थे। इसके बाद पूरा टावर चंदन गैंग के हवाले होता था।

उस रात के बाद चंदन बना इंटरनेशनल लुटेरा  
चंदन के इंटरनेशनल लुटेरा बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। रातोंरात करोड़पति बनने की चाहत रखने वाले चंदन ने दो साल पहले अपने घर में हुई चोरी के बाद इसी तरह बड़ा हाथ मारने की योजना बना ली थी।
विज्ञापन

इंटर पास चंदन का पिता रविंद्र नाथ पांडेय सिंचाई विभाग से रिटायर एसडीओ है। चंदन का भाई दिल्ली की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पटना से दिल्ली आए चंदन को कहीं अच्छी नौकरी न मिली तो नेटवर्किंग कम्युनिकेशन का कोर्स किया। वह एकॉर्ड कम्युनिकेशन कंपनी में जॉब करने लगा। कंपनी जो पैसा देती थी, उसमें उसका ही खर्च निकल पाता था। कामकाज थोड़ा ठीकठाक चलने लगा तो चोरों ने चंदन का घर खंगाल डाला। उसके बाद चंदन ने नौकरी छोड़ दी। कुछ दिन बेरोजगार रहा। फिर नोकिया सिमेंस नेटवर्किंग दिल्ली और वोडाफोन के बाद एनआर स्विचेज सेक्टर 55 गुड़गांव में करीब पांच माह आउट सोर्सिंग पर काम किया।
इस कंपनी के पास रिलायंस जियो के 4-जी बीटीएस का भी काम था। रिलायंस जियो की जिन साइटों पर 4-जी का काम चल रहा था, उसकी पूरी डिटेल चंदन के पास रहती थी। चंदन के रिलायंस जियो के अत्याधुनिक उपकरणों को लूटने का प्लान बनाया। सबसे पहले अपने सहकर्मी रहे अपूर्व श्रीवास्तव को साथ जोड़ा। इंजीनियर अपूर्व भी दिल्ली, लखनऊ और मुंबई की कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुका था। उसके बाद एक के बाद एक पवन, भरत, क्षितिज, उत्कर्ष, संदीप को जोड़ा। पुलिस के अनुसार अपूर्व, संदीप और क्षितिज के पिता बीएचईएल में जॉब करते हैं। तीनों ही अमेठी में एक कॉलोनी में रहते हैं। जिसके चलते अपूर्व के मार्फत चंदन की उनके साथ दोस्ती हो गई थी। गाड़ी चलाने की समस्या पर दिल्ली निवासी धर्मेंद्र और देवेंद्र को हर माह पांच हजार रुपये पर शामिल कर लिया।  

टीम को 25 हजार का इनाम
आईजी सुजीत पांडेय ने बताया कि इस खुलासे का श्रेय क्राइम ब्रांच प्रभारी संजीव यादव और उनकी टीम को जाता है। उसके  साथ ब्रह्मपुरी थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने भी पूरा सहयोग दिया। क्राइम ब्रांच, ब्रह्मपुरी थाना पुलिस और सर्विलांस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया गया है।

रिलायंस कंपनी की तरफ से थैंक्स
इस खुलासे के दौरान रिलायंस जियो प्रवक्ता भी पुलिस लाइन पहुंचे। जियो प्रवक्ता ने आईजी, एसएसपी से मुलाकात की और पुलिस टीम को थैंक्स बोला। उनका कहना था कि ये बदमाश न जाने कितने टावर लूटते। इस खुलासे से कंपनी को बड़ी राहत मिली है।

खुलासे से खुली पूर्व एसओ की पोल  
रिलायंस जियो टावर में करीब तीन करोड़ की डकैती को तत्कालीन एसओ ब्रह्मपुरी सतेंद्र यादव ने चोरी में दर्ज किया था। पुलिस अधिकारियों को भ्रमित कर सामान तीन या चार लाख रुपये का बताया था। बाद में मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने पर आईजी ने क्राइम ब्रांच को खुलासे के लिए लगाया था। जांच में पूर्व एसओ की घोर लापरवाही सामने आने पर आईजी ने सतेंद्र यादव को तत्काल थाने से हटाकर सहारनपुर ट्रांसफर कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें