पक्षी विशेषज्ञ डॉ. हफीफुल्लाह
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एनएएस डिग्री कॉलेज के सांख्यिकी विभाग में आज विश्व गौरैया दिवस पर गौरैया संरक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। शहर में एनएएस डिग्री कॉलेज, फेज वन पल्लवपुरम, आबूलेन, कंपनी बाग, सूरजकुंड पार्क और शास्त्रीनगर के इलाके में काफी पाई जाती हैं।
कोशिकाओं, खून में घुल रहा रेडिएशन
गौरैया सहित अन्य छोटे पक्षियों पर रेडिएशन का दुष्प्रभाव हो रहा है। देश में गौरैया व पक्षियों की गणना और इनके सर्वाइवल पर शोध का खासा अभाव है। इसलिए आंकड़ों में गौरैया कितनी हैं, कहना मुश्किल है। लेकिन ईएमएस का बड़ा असर गौरैया की कोशिकाओं व रक्त को प्रभावित कर रहा है। इसका असर उसके डीएनए पर हो रहा है। प्रो. हफीफुल्लाह खान, वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ, प्रवक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विवि
नहीं मिल रहे रुचिकर कीट
गौरेया के रुचिकर भोजन नन्हें कीड़ों (लिमेटोर) व अनाज का अभाव हो रहा है, इसलिए गौरेया एकांतवास में जा रही है। खेतों की जुताई के वक्त काफी संख्या में गौरेया मिलती हैं। डॉ. आर.एस.सेंगर प्रोफेसर एवं एचओडी जैव प्रौद्योगिकी विभाग कृषि विवि मोदीपुरम
बैठक हो रही खत्म
गौरेया भूमि से कीटों को खा लेती है इसलिए खेती में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। ग्रंथों व इतिहास में भी गौरेया का महत्व बताया जाता रहा है। घौंसलों की कमी नहीं हैं लेकिन उसकी बैठक, ठिकाने नष्ट हो रही हैं। रजत भार्गव पक्षी विशेषज्ञ
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