हारिस ने कहा कि दारुल उलूम का पाकिस्तान और मसूद अजहर से कोई ताल्लुक नहीं है। सुरेंद्र जैन दारुल उलूम पर अंगुली उठाने से पहले साबित करें कि वो जो कह रहे हैं ठीक है। इस मौके पर जुनैद इलाही, कलीम चौधरी, पप्पू प्रधान, असलम, युसूफ पठान, उस्मान कस्सार और जुनैद सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
वहीं, मोहल्ला खानकाह में हुई बैठक में समाजसेवी हकीम मुजम्मिल अली ने कहा कि सुरेंद्र जैन को दारुल उलूम पर अंगुली उठाने से पहले अपनी आंखों से सांप्रदायिकता का चश्मा उतारकर एक बार दारुल उलूम के इतिहास को अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुरेंद्र जैन और उन जैसे नेताओं का मकसद इस तरह के बयान देकर हिंदू-मुस्लिमों के बीच नफरत की दीवार खड़ी सियासी रोटियां सेंकना है। दारुल उलूम एक दीनी इदारा है जिसने मुल्क की आजादी में अहम किरदार अदा किया। मुजम्मिल अली ने कहा कि सबसे बड़े दहशतगर्द वो खुद है जो हिंदू मुस्लिम फसाद कराकर दहशत का माहौल पैदा करना चाहते हैं। इस मौके पर इस्लाम प्रधान, मोबिन, अमजद, संदीप राणा, खुर्रम आदि मौजूद रहा।
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