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एसपी सिटी ने पकड़ा लाखों का गेहूं, आपूर्ति विभाग ने दी क्लीन चिट 

Wed, 05 Jul 2017 09:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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पकड़ा गया गेहूं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राशन का गेहूं मिल में बेचने की सूचना पर एसपी सिटी ने घेराबंदी कर भूसा मंडी के पास गेहूं से भरे छह ट्रेक्टर ट्राली और डीसीएम पकड़ लिए । इनमें करीब एक हजार गेहूं की बोरियां लदी थी, लेकिन घंटो चली पड़ताल के बाद आपूर्ति विभाग ने क्लीन चिट देकर इन्हें छोड़ दिया। एसपी सिटी मान सिंह चौहान के अनुसार मंगलवार सुबह सूचना मिली कि कुछ लोग भूसा मंडी के पास राशन के गेहूं को वाहनों में भरकर भूंसा मंडी के पास फ्लोर मिल में बेचने जा रहे हैं। सूचना पर एसपी सिटी ने पुलिस बल के साथ भूंसा मंडी की घेराबंदी कर गेहूं से लदी तीन ट्रेक्टर ट्राली और तीन डीसीएम पकड़ ली। एसपी सिटी के अनुसार गेहूं की कई बोरियों पर सरकारी बीज गोदाम की मुहर भी लगी थी। गेहूं के साथ कोई खसरा खतौनी की नकल आदि नहीं मिलाी तो पुलिस ने सभी वाहनों के चालक और उनके साथ बैठे नौ लोगों को हिरासत में ले लिया और भूसा मंडी पुलिस चौकी ले गई।  जिला आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को मामले की सूचना दे दी। खाद्य निगम के एआरएम मनोज जयसवाल, आपूर्ति विभाग के सप्लाई इंस्पेक्टर विकास कुमार, धर्मेंद्र वर्मा, रविंद्र कुमार, ऋषि कुमार गौड़ आदि ने पकड़े गए लोगों के बयान दर्ज किए । 
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जांच का दिखावा कर दिया पूरा मौका 
गेहूं पकड़ने के बाद ही क्लीन चिट देने का खेल शुरू हो गया था। एसपी सिटी ने सुबह करीब 10 बजे गेहूं पकड़ा था। आपूर्ति विभाग की जांच में इतना समय लगा दिया कि गेहूं को किसानों का साबित करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया। एक  के बाद एक गेहूं के दावेदार भी अपनी खसरा खतौनी लेकर चौकी पर पहुंचने शुरू हो गए । शानदार कारों में सवार लोग चौकी पहुंचे और बड़े रौब भरे अंदाज में गेहूं को अपना होने का दावा किया। भाकियू नेताओं को भी फोन होने लगे। दोपहर करीब तीन बजे सिटी मजिस्ट्रेट चौकी पहुंचे। उनके सामने पकडे़ गए गेहूं की जांच का ड्रामा हुआ। शाम को पकडे़ गेहूं को किसानों का बताकर क्लीन चिट दे दी गई। दोपहर करीब ढाई बजे जब भूसा मंडी चौकी पर मौजूद आपूर्ति इंस्पेक्टर अन्यों से बात की गई तो वह गेहूं वालों की पैरवी तक करने लगे। एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि ये तो किसानों का गेहूं है। रामराज के एक किसान के बारे में तो कहा कि ये तो पुराने किसान हैं।  

 माफिया अधिकारी ने मिलकर कर दिया राशन घोटाला
मेरठ। मेरठ में राशन माफियाओं का पूरा सिंडिकेट है। पिछले दिनों माफियाओं के सिंडिकेट ने एक राशन माफिया को अपने से अलग कर दिया। ऐसे में पैदा हुई आपसी फूट में मुखबिरी भी होने लगी। इसी मुखबिरी के चलते मंगलवार को गेहूं को पकड़ लिया गया। इस गेहूं को लेकर जब जांच शुरू हुई तो गेहूं ले जाने वाले कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। लेकिन बाद में बोरों पर सरकारी मुहर न होने की बात कहते हुए इन्हें क्लीन चिट दे दी गयी।
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ये उठ रहे सवाल
क्या जिले के आला अधिकारी नहीं जानते कि काला बाजारी का गेहूं सरकारी बोरो में नहीं बल्कि दूसरे बोरों में पलटकर बाजार में बेचा जाता है। लेकिन यहां अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। एसपी सिटी की बात तक को अनसुना कर दिया गया। इसके अलावा दूसरा बड़ा सवाल ये उठता कि रामराज या हस्तिनापुर के किसान यहां किसके पास गेहूं बेचने ला रहे थे। यदि किसान किसी फ्लोर मिल में गेहूं बेचने जा रहे थे तो उनके पास क्या उस फ्लोर मिल की कोई रसीद आदि क्यों नहीं थी।
माफियाओं के दबाव में स्वेज पंवार को भी हटाया था
राशन माफियाओं का अधिकारियों से गठजोड़ कितना बड़ा है, इसका उदाहरण पिछले दिनों सरधना में देखने को मिला। जब डिप्टी आरएम का कार्यभार देख रही स्वेज पंवार को भी माफियाओं के दबाव में बिना किसी जांच के हटा दिया था। जबकि स्वेज पंवार ने सरधना के सरकारी गोदाम से हो रही कालाबाजारी का खुलासा किया था। लेकिन कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई के बजाए उल्टे स्वेज पंवार को हटा दिया गया। इसके विपरीत कई दागी अधिकारियों को दो दो स्थानों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।


- सिटी मजिस्ट्रेट और आरएफसी की मौजूदगी में पुलिस द्वारा पकडे़ गए गेहूं की जांच की गई। राशन के बारों की जांच बोरे की मुहर और सील से होती है, लेकिन जांच में यह गेहूं राशन का नहीं मिला। किसानों ने आकर गेहूं को अपना बताया और खसरा खतौनी दिखाई। अब मंडी समिति वाले इसकी जांच करेंगे। 
राकेश कुमार जिलापूर्ति अधिकारी
 
- जब हमने गेहूं पकड़ा था उस वक्त किसी के पास कोई कागजात नहीं था। ना ही वह खसरा खतौनी दिखा सके। गेहूं की बोरियों पर सरकारी सीड केंद्र की मुहर लगी थी। यदि यह किसानों का था तो उन्हें तभी किसान बही आदि कागजात दिखाने चाहिए थे। चूंकि मामला आपूर्ति विभाग से जुड़ा है पुलिस सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती।
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मान सिंह चौहान एसपी सिटी
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