मेरठ। सेरेब्रल पाल्सी (मस्तिष्क पक्षाघात) एक दिमागी विकार है जो किसी को भी जीवनभर के लिए दिव्यांग बना सकता है। इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे दो जुड़वा भाई जीने की नई सीख दे रहे हैं। इनकी कहानी विपरीत परिस्थितियों में हौसलों को उड़ान देने वाली है। साथ ही लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल छह अक्तूबर को मनाए जाने वाले विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस के लिए सबसे अच्छा उदाहरण भी है।
मेरठ में जेल चुंगी के पास बलवंत एंकलेव में रहने वाले जुड़वा भाई आयुष और और पीयूष गंभीर बीमारी होने के बावजूद शैक्षिक अध्ययन प्रक्रिया में निरंतर सफलता हासिल कर रहे हैं। हाल ही में आयुष ने बीएड में 69 प्रतिशत अंक और पीयूष ने 72 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इंटर की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया था और तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें सम्मानित किया था। दिव्यांगजनों की सेवा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार 2022 में उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाज चुकी है। समाज सेवा भी करते हैं। अब तक 25000 से अधिक पौधे भी लगा चुके हैं। आयुष और पीयूष ने बताया कि उन्हें स्कूल में एडमिशन देने से भी मना कर दिया गया था। माता सुधा गोयल बताती हैं कि जब दोनों का जन्म हुआ तब इनका वजन काफी कम था। डॉक्टरों की सलाह पर उनकी दिल्ली एम्स में जांच कराई गई तो पता चला कि दोनों भाई सेरेब्रल पाल्सी नामक असाध्य रोग से ग्रसित हैं।
क्या है सेरेब्रल पालसी
सेरेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जो बच्चों की शारीरिक गति, चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है। सेरेब्रल शब्द का अर्थ मस्तिष्क के दोनों भागों से होता है और पाल्सी शब्द का अर्थ शारीरिक गति की कमजोरी या समस्या से है। यह एक तरह की दिव्यांगता है जिसमें बच्चों को वस्तु पकड़ने और चलने में समस्या होती है।
सेरेब्रल पाल्सी का इलाज
दिमाग के रोगों के विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने बताया कि हालांकि इस बीमारी में बच्चे को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से कई तरीकों से बच्चे के विकास में मदद कर सकता है। दवाइयां, सर्जरी और थैरेपी इस बीमारी के इलाज का सबसे सामान्य रूप है। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. स्तुति गिरी गोस्वामी ने बताया कि इस बीमारी में फिजियोथैरेपी काफी कारगर है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और यह कमजोरी को कम करने में काफी सहायक होती है।