मेरठ। आधुनिकता के इस दौर में युवाओं के लिए जिंदगी में सफलता हासिल करना एक बड़ी चुनौती है। वहीं दूसरी ओर सफलता पाने के बाद उसे पचाना भी किसी कला से कम नहीं है। गंगानगर निवासी भुवनेश्वर कुमार भामाशाह स्टेडियम में पसीना बहाकर आज क्रिकेट जगह की सुर्खियों में हैं। लेकिन सफलता के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी भुवनेश्वर अपने दोस्तों और आस पड़ोस के लोगों से बड़ी सादगी से मिलते हैं। उन्हें स्टारडम छू कर भी नहीं गुजरा। आज भी वह अपने पुराने कोच के पास आकर प्रेक्टिस करते हैं।
भुवनेश्वर के कोच संजय रस्तोगी बताते हैं कि भुवी ने सफलता पचाने का यह गुर सचिन तेंदुलकर से सीखा है। सचिन तेंदुलकर खेल के जिस शिखर पर पहुंचे, वहां किसी भी खिलाड़ी के जीवनशैली और स्वभाव में बदलाव संभव है। लेकिन तेंदुलकर के खेल के साथ उनकी पहचान एक अच्छे स्वभाव वाले खिलाड़ी के तौर पर होती है। टीम इंडिया का हर खिलाड़ी तेंदुलकर से शोहरत पचाने के गुर सीखना चाहता है।
दोस्त गौरव गोयल और परमिंदर सिंह ने बताया कि भुवनेश्वर भी तेंदुलकर के पद चिन्हों पर चल निकले हैं। भुवी के घर आते ही आसपास के लोग उनसे मिलने को बेताब रहते हैं, तो भुवी भी किसी का दिल नहीं तोड़ते। वो खुले दिल से प्रशंसकों से मिलते ही नहीं, बल्कि साथ फोटो भीखिंचवाते हैं। वह जब भी घर आते हैं पुराने दोस्तों संग बाहर घूमने निकल जाते हैं। यह सादगी ही भुवी को तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी की श्रेणी में खड़ा कर देती है।
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