दिल्ली के जनकपुरी से खरीदी थी एक लाख रुपये की डिवाइस
एसटीएफ नोएडा यूनिट के उपाधीक्षक राजकुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी संजीव कुमार ने सॉल्वर बनने के लिए काफी समय तक डिवाइसों के बारे में जानकारी ली। उसने पूरी विधि को समझा, इसके बाद सबसे पहले उसने डिवाइस का इस्तेमाल कर वास्तविक अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा सेंटर में सॉल्वर भेजने की तैयारी की।
वह सोनू के साथ ही दिल्ली के जनकपुरी मेट्रो स्टेशन में एक दुकान पर गया और वहां से ईयर पीस एवं रिसीविंग डिवाइस मशीनें खरीदीं। जिनकी कीमत लगभग नौ हजार रुपये प्रति मशीन थी।
एक दिन पहले ही मिल गई थी एसटीएफ को जानकारी
बताया गया कि एसटीएफ को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद संवर्ग प्रतियोगात्मक परीक्षा 2018में सॉल्वर गैंग के बारे में पहले ही जानकारी हो गई थी। फोन पर हुई बातों को एसटीएफ ने ट्रेस कर लिया था। जिसके बाद से टीम द्वारा उनका लगातार फोन कॉल पर नजर रखी जा रही थी।
सॉल्वर गैंग भी एक दिन पहले सहारनपुर पहुंच गया था और एसटीएफ की टीम भी पीछा कर रही थी जिसमें टीम बुधवार को ही सहारनपुर पहुंच गई थी। टीम सॉल्वर गैंग की हर हरकत को वॉच कर रही थी।
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