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मेरे देश के सिपाही तू कहां चला गया

Mon, 27 Jun 2016 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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शहीद जवान के घर लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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मेरे देश के सिपाही तू कहां चला गया, मेरे लाल अब तेरे बिना मैं कैसे रहूंगी। छोटी-छोटी बच्चियां तेरे बारे में पूछेंगी तो मैं क्या जवाब दूंगी। पिता को अब कौन सहारा देगा। अब कौन रोज फोन कर मेरा हालचाल पूछेगा। जम्मू कश्मीर के पांपोर में शहीद हुए सतीश चंद की मां बाला देवी अपने बेटे को याद कर यही कह रही थीं। वह बार-बार बेहोश हो रही थीं। दूसरी तरफ पत्नी सावित्री भी बेसुध पड़ी थी। बीच-बीच में होश आता तो चीख उठती और फिर बेहोश हो जाती। पिता आंसुओं को छुपाए गमगीन बैठे थे। शाम 7:21 पर शहीद का शव पहुंचा तो आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर केवल रोने और चीख की आवाज सुनाई दे रही थी।
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शनिवार को कश्मीर के पांपोर में फायर ट्रेनिंग कर लौटते समय आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के जवानों की बस पर हमला कर दिया था। इसमें गांव बली निवासी संतीश चंद मावी भी शहीद हो गए थे। शाम करीब आठ बजे  बटालियन के डिप्टी कमांडेंट जितेंद्र ने उनके पिता सतपाल मावी को फोन कर शहादत की खबर दी। फोन सुनते ही पिता बेहाल हो गए। मां और अन्य परिजन दहाड़ मार-मारकर रोने लगे। गांव में खबर फैली तो हर कोई शहीद के घर की ओर दौड़ पड़ा। जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान, विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, ब्लॉक प्रमुख केपी खुंटी, युवा नेता गुल्लू प्रधान, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनय प्रधान, पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद मोघा, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष पंडित सत्यप्रकाश गौतम, रालोद युवा जिलाध्यक्ष बिजेंद्र भाटी, नरेंद्र खजूरी, पूर्व विधायक अतुल खटीक, गोपाल काली, रमेश गोलाबढ़, ग्राम प्रधान कालू सिंह ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।

साढ़े 23 घंटे का इंतजार और 15 मिनट का दीदार
रविवार शाम 7:21 पर जवान का शव पहुंचा तो कोहराम मच गया। चारों ओर चीख पुकार मच गई। पत्नी सावित्री का और बुरा हाल हो गया। तीन-चार महिलाएं उसे पकड़कर शव के पास ले गईं। अंतिम बार सावित्री ने अपने पति के चरण छूकर विदाई दी। कुछ ही पल जवान का शव घर पर रखा गया, उसके बाद अंतिम संस्कार के लिए ले गए। साढ़े 23 घंटे के इंतजार के बाद परिवार वाले केवल 15 मिनट ही अपने लाल को देख सके। बडे़ भाई अशोक कुमार ने शहीद को मुखाग्नि दी। 
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साथियों ने दिया गार्ड ऑफ आनर 
शहीद को ग्रामीणों और साथियों ने सलाम किया। जवानों ने गार्ड ऑफ आनर देखकर साथी को विदा किया। शव यात्रा में एडीएम प्रशासन दिनेशचंद, एसएसपी जे. रविंदर गौड़, एसपी देहात डॉ. प्रवीण रंजन, सीआरपीएफ के कमांडेंट, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल रहे। 

इंटर करते ही हो गया था भर्ती 
सतीश चंद मावी ने कस्बे के गांधी स्मारक देवनागरी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। उसके बाद वह 2002 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गया था। भाई अशोक ने बताया कि सतीश को खेलकूद का बहुत शौक था। वह बचपन से ही सेना में जाना चाहता था। 2004 में थाना फलावदा के गांव मंदवाडी निवासी सावित्री के साथ उसकी शादी हुई थी। 

हंसमुख था सतीश 
ग्रामीणों ने बताया कि सतीश हंसमुख और अच्छे स्वभाव का था। जब कभी भी वह छुट्टी लेकर गांव आता था तो सभी से मिलता था। बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेता था।

बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने का था सपना 
सतीश अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने चाहते थे। इसीलिए मोदीपुरम के अक्षरधाम कॉलोनी में किराए का मकान ले रखा था। पत्नी वहां रहकर बेटियों को पढ़ा रही हैं। बड़ी पुत्री नौ वर्षीय रिंशिका 5वीं और छोटी पुत्री पांच वर्षीय अनुष्का पहली कक्षा में पढ़ रही है।

दादा को शहीद की बेटियों की चिंता 
पिता सतपाल सिंह को अपने पुत्र सतीश की शहादत पर गर्व है। उनका कहना कि बेटे ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं, इसका उन्हें गर्व है। लेकिन दुख इस बात का है कि मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। अब उनके भविष्य की चिंता है।  

बेटी से किया था घर आने का वादा
हैलो गुड़िया, कैसी हो। पढ़ाई पर ध्यान देना। मम्मी को ज्यादा परेशान मत करना। किसी बात की चिंता मत करना। मेरी छुट्टी पास हो गई है, एक जुलाई को घर आ रहा हूं। छोटी बहन का ध्यान रखना। उससे लड़ाई मत करना। मुझे तुम लोगों की बहुत याद आती है। तुमसे मिलकर ढेर सारी बातें करूंगा। 
 
गांव में नहीं जले चूल्हे 
शहादत की खबर सुनकर पूरा गांव सतीश के घर पर उमड़ पड़ा। रविवार को पूरे गांव में चूल्हे नहीं जले। सुबह से शाम तक लोग शहीद के शव का इंतजार करते रहे। पिता, मां, पत्नी और भाई की आंखें पथरा गईं।  

सरकार सख्ती से नहीं निपटती 
शहीद के परिजनों और ग्रामीणों में सरकार के खिलाफ गुस्सा भी दिखा। उन्होंने कहा कि आतंकी आए दिन जवानों को मार रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार कुछ नहीं कर रही है। बेकार मुद्दों पर तो देश में बहस होती है, लेकिन आतंकवाद पर किसी का ध्यान नहीं है। 

भारत माता के जयकारे लगे 
शहीद का शव पहुंचते ही ग्रामीणों ने भारत माता की जय, सतीश तेरा यह बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान के नारे लगाए। उन्होंने पाकिस्तान पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। 
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