यूपी रोडवेज की अनुबंधित बसों को अपने डीजल पंप से डीजल बिक्री करने की योजना जल्द परवान चढ़ने जा रही है। सोहराबगेट डिपो पर प्रस्तावित डीजल पंप के लिए इंडियन ऑयल कंपनी ने सर्वे कर लिया है। हालांकि भैसाली बस अड्डे पर प्रस्तावित पंप जमीन के मालिकाना हक मामले में फंस गया है। शासन से एनओसी मिलने के बाद ही इस बस अड्डे पर डीजल पंप लगाया जा सकता है।
बसों की कमी के चलते उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने प्राइवेट बस आपरेटरों की बसें अनुबंधन के आधार पर अपने यहां लगा रखी हैं। मेरठ रोडवेज रीजन में भी करीब 250 अनुबंधित बसें संचालित हो रही हैं। विभाग की ओर से इन बसों को प्रति किलोमीटर के आधार पर भुगतान किया जाता है। बसों में डीजल और चालक आपरेटर व परिचालक विभागीय होता है। बस आपरेटर अपनी बसों में डीजल रोडवेज के डीजल पंपों की बजाय बाहर से खरीदते हैं। इसके लिए विभाग को बस की आय का 40 फीसदी रुपया डीजल के लिए भुगतान करना पड़ता है। पिछले दिनों रोडवेज एमडी रवींद्र के नायक ने अनुबंधित बसों को डीजल का पैसा नहीं देकर अपने पंपों से डीजल मुहैया कराने के निर्देश दिए थे। मेरठ रीजन के सभी डिपो में डीजल पंप लगा है। निगम की बसों में इन पंपों से ही डीजल भरा जाता है। लेकिन इनकी क्षमता इतनी नहीं कि अनुबंधित बसों का कोटा पूरा किया जा सके। इसके लिए रोडवेज ने इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के पास भैसाली और सोहराबगेट बस अड्डे पर एक-एक डीजल पंप लगाने का प्रस्ताव भेजा था। कंपनी ने टीम भेजकर दोनों जगह का सर्वे करा लिया है। सोहराबगेट बस अड्डे पर पुराने साइकिल स्टैंड पर डीजल पंप बनाया जाना प्रस्तावित हैै। लेकिन भैसाली बस अड्डे पर लगने वाले पंप जमीन विवाद में फंस गया है। भैसाली बस अड्डे की जमीन रोडवेज की नहीं है, बल्कि राजस्व विभाग की है। आरएम एसके बनर्जी ने बताया कि यहां के लिए शासन से मंजूरी के बाद ही कुछ हो सकता है। जरूरत के मुताबिक ही डीजल पंपों की मांग की गई है।