रोडवेज विभाग के पानी बचाने के मामले में दो चेहरे हैं। गढ़ रोड स्थित सोहराबगेट डिपो जहां आधुनिक वाशिंग प्लांट के जरिये लाखों लीटर पानी बचाया जा रहा है, जबकि दिल्ली रोड स्थित मेरठ डिपो में सबमर्सिबल से बसों की धुलाई कर लाखों लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है। यहां रखा वाटर टैंक लंबे समय से फूटा पड़ा है। इसमें से 24 घंटे पानी बहता रहता है। विभागीय लापरवाही से पानी नाले में बह रहा है।
रोडवेज को अपने 500 बसों के बेड़े की धुलाई के लिए रोजाना हजारों लीटर पानी की आवश्यकता होती है। वर्ल्ड वाटर डे की पूर्व संध्या पर अमर उजाला टीम ने मेरठ डिपो और सोहराबगेट डिपो की वर्कशाप में की गई बसों की धुलाई के इंतजाम को देखने के लिए दौरा किया। मेरठ डिपो की वर्कशाप में आधुनिक वाशिंग प्लांट की बजाय सबमर्सिबल से सीधे बसों की धुलाई होती मिली। डिपो में रोजाना करीब 80 बसों की धुलाई की जाती है। सबमर्सिबल के जरिये होने वाली धुलाई में रोजाना करीब 28 से 30 हजार लीटर पानी खर्च होता है।
सोहराबगेट डिपो बचा रहा पानी
दूसरी और जब टीम सोहराबगेट डिपो पहुंची तो यहां के वर्कशाप में लगे आधुनिक वाशिंग प्लांट से बसों की धुलाई होती मिली। इस प्लांट के जरिये सबमर्सिबल के सापेक्ष केवल एक चौथाई पानी से ही बसों की सफाई हो जाती है। अधिकारियों का कहना है कि प्लांट से रोजाना करीब 60 बसों की सफाई होती है। जिन पर औसतन 6 हजार लीटर पानी रोजाना खर्च होता है। जबकि सबमर्सिबल से इतनी बसों की धुलाई के लिए 20 से 22 हजार लीटर पानी खर्च होता है। सोहराबगेट डिपो इस प्लांट से रोजाना 14 से 16 हजार लीटर पानी बचाता है।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने की पानी की बचत की मांग
यूपी रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के मेरठ शाखा अध्यक्ष राजेश त्यागी ने विश्व जल दिवस पर कर्मचारियों से पानी बचाने का संकल्प लेने की अपील की। बसों की धुलाई के लिए भी कम पानी खर्च करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करने की मांग की।
रेलवे की चाहत, बचे पानी
सिटी स्टेशन अधिकारियों की भी चाहत है कि वे भी आधुनिक तकनीक के जरिये पानी की बचत करे तो ज्यादा बेहतर होगा। इसके लिए अधिकारियों ने प्लेटफार्म नगर एक की पक्की लाइन की धुलाई के लिए वाटर जेट मशीन की मांग की है। फिलहाल लाइन की धुलाई सबमर्सिबल के जरिये की जा रही है। इस व्यवस्था में रोजाना करीब 8 हजार लीटर पानी खर्च होता है। वहीं स्टेशन स्थित वाशिंग लाइन में भी ट्रेनों की धुलाई सबमर्सिबल से की जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी वाशिंग लाइन में भी आधुनिक सिस्टम नहीं लगाया है। यहां भी हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है।
ड्रिप इरिगेशन से बचा रहे पानी
नंगलामल शुगर मिल पानी के संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान चला रहा है। मिल ने गन्ना विभाग की मदद से क्षेत्र के करीब तीन हजार हेक्टेयर रकबे में ड्रिप इरिगेशन स्थापित करा दिया है। ड्रिप इरिगेशन के जरिये परंपरागत तरीके से होने वाली सिंचाई के मुकाबले 30 फीसदी पानी में ही फसल की सिंचाई हो जाती है। इस तकनीक से 70 फीसदी पानी बचाया जा सकता है।