फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल ट्रेडिंग में फंसे मेरठ के दो अरब रुपये, क्या है पूरा मामला

Fri, 03 Feb 2017 11:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सोशल ट्रेडिंग के जरिये रातोंरात मोटी रकम कमाने की हसरत अब सपना बनकर ही रह सकती है। उल्टे अपने जेब से ट्रेडिंग में लगाई रकम भी गंवा सकते हैं। क्योंकि नोएडा में यूपी एसटीएफ द्वारा की कार्रवाई में 37 अरब से ज्यादा का घोटाला पकड़ा गया है, जिसका संबंध सोशल ट्रेडिंग की दो प्रमुख कंपनियों से है। जिन्होंने करीब डेढ़ साल के अंदर लोगों के सामने सपनों की ऐसी बुनियाद तैयार कर रोजाना करोड़ों रुपया बटोरा। लोगों पर ऐसा भरोसा कायम किया कि कारोबार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से दौड़ा। लेकिन अब कंपनी मालिक और उनमें पैसा लगाने वाले दोनों ही मुश्किल में हैं। मेरठ के भी करीब 35 हजार लोगों के माथे पर पसीना है। जिनकी 42 हजार से अधिक आईडी पर करीब दो अरब रुपये सोशल ट्रेडिंग में फंसे हैं।
विज्ञापन


सेंट्रल एक्साइज और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) से जुड़े आंकड़े बता रहे हैं कि मेरठ और उसके आसपास जिलों के 35 हजार से ज्यादा लोगों ने सोशल ट्रेडिंग कंपनियों में पैसा लगाया है। उनमें से कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होंने एक झटके में अमीर होने की हसरत में अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी। एक ही व्यक्ति ने 10 से 20 आईडी तक लगाईं। सेंट्रल एक्साइज से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि करीब 42 हजार से अधिक की आईडी अकेले मेरठ से लगी हैं। जिनके जरिये लोगों ने करीब 200 करोड़ से अधिक की धनराशि लगाई है। जबकि दोनों कंपनियों में करीब सात लाख लोगों ने पैसा लगाया है, जिसमें अधिकांश लोग दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र के हैं।

‘अमर उजाला’ ने चेताया था
‘अमर उजाला’ ने 28 जनवरी के मेरठ माय सिटी अंक में खुलासा किया था कि बड़ी संख्या में सोशल ट्रेडिंग कंपनियां डीजीसीईआई व अन्य एजेंसियों के रडार पर हैं। सरकारी एजेंसियों ने ऐसी कंपनियों को संदिग्ध मानते हुए जहां अपनी नजरें टेढ़ी कर दी हैं तो जल्द ही एक्शन मोड में हैं।
विज्ञापन


असली नुकसान इन्हें   
बीते छह माह में जिन लोगों ने बड़ी रकम सोशल ट्रेडिंग के लिए तमाम कंपनियों के खातों में प्लान खरीदने के लिए डाली है, उन सभी के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि अभी तक उनकी पूरी रकम नहीं लौटी है। बताया जा रहा है कि दो अरब में से करीब 140 करोड़ की रकम बीते छह महीने से भी कम समय के अंदर आईडी खरीदने में लोगों ने दोनों कंपनियों को दी है। जिनकी अभी मूल रकम भी नहीं लौटी है। अब जब दोनों कंपनियों पर संकट के बादल हैं तो पैसा डूबने की संभावना बरकरार है। अधिकांश लोगों ने 57,500 रुपये का प्लान खरीदा।

क्या है पूरा मामला
दो दिन पहले यूपी एसटीएफ ने ऑब्लेज इंफो सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के चेयरमैन अनुभव मित्तल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की। एसटीएफ के अनुसार कंपनी ने सोशल ट्रेड डॉट बिज, फ्रैंजप डॉट कॉम, फ्रीहब डॉट कॉम, इंटमार्ट डॉट कॉम और थ्री डब्ल्यू डॉट कॉम नाम से ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल चलाए हुए थे। नोएडा के दो थानों में इन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इन कंपनियों में लोगों ने एक साल का पैक खरीदकर पैसा लगाया था। लेकिन कंपनियों ने पुराने लोगों को पैसा देना बंद कर दिया था। बाद में धोखाधड़ी के आरोप लगे तो शिकायत पर एसटीएफ ने कार्रवाई की।

टैक्स तो लगातार दिया
सेंट्रल एक्साइज के सूत्रों के अनुसार इन दोनों कंपनियों ने दिसंबर महीने में बीती तिमाही का करीब 124 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स दिया। जिसमें से सोशल ट्रेड डॉट बिज ने ही करीब 90 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स अदा किया।

केस 1- सरधना की अर्चना गुप्ता ने बीते साल सोशल ट्रेडिंग के जरिये 57500 का प्लान खरीदा। रोजाना उनके खाते में 770 रुपये आने शुरू हुए तो उन्होंने अपने साथ 57500 की दो आईडी और जोड़ लीं। उन्हें रोजाना 1540 रुपये मिलने शुरू हो गए। साल में 1.72 लाख रुपये लगाकर 7.50 लाख रुपया मिलने का अंदाजा लगाकर धड़ल्ले से आईडी लगाने का सिलसिला शुरू हुआ और एक साल में 12 लाख रुपये लगा डाले।

केस -2 बच्चा पार्क स्थित एक कांप्लेक्स में कंप्यूटर शॉप चलाने वाले राजीव कुमार ने सोशल ट्रेडिंग के जरिये सुनहरे सपने देखे। उन्होंने दोस्त के साथ मिलकर छह माह में करीब 5.50 लाख रुपये सोशल ट्रेडिंग में लगाए।  जिसमें से अभी तक तीन लाख रुपये ही लौटे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें