मेरठ। सिटी स्टेशन पर जिला प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग लागू कराने में फेल साबित हुआ। रेलवे ने श्रमिकों को स्टेशन तक लाने के लिए जो सुझाव दिया था, उसमें श्रमिकों को स्टेशन पर बसों द्वारा जिला प्रशासन को लाना था। इसके बाद उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए कोच तक ले जाना था। लेकिन ये नियम प्रशासन लागू नहीं करा पाया। स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर रेलवे स्टाफ और एमडीए कर्मचारियों को इन यात्रियों को टिकट देने के लिए लगाया गया। लेकिन यहां भी पुलिस ने कोई सहायता नहीं की। हालात ये हो गए कि पहले टिकट लेने के चक्कर में श्रमिक आपस में ही भिड़ गए। इससे वहां भगदड़ मच गई और सोशल डिस्टेंसिंग के दावे हवा में उड़ गए। सिटी स्टेशन अधीक्षक आरपी शर्मा ने कोच के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग बनवाते हुए श्रमिकों को ट्रेन में चढ़वाया।
चप्पल उतरी, बोतलें गिरीं
भगदड़ मचने पर श्रमिक ट्रेन की तरफ भागने लगे। कई श्रमिकों की प्लेटफार्म पर ही चप्पल उतर गई। कई के हाथों से बोतल छूट गई। कोई स्टेशन के अंदर पहुंचा तो कोई अपनों को ढूंढने लगा। कई यात्रियों को टिकट भी नही मिल सके। वह एमडीए सचिव की मोहर लगे कागज को लिए ही यात्रा पर निकल गए।
गोले पर खराब गए
स्टेशन पर एक दिन पहले दो-दो मीटर की दूरी पर गोले बनाए गए थे। इनकी मदद से सोशल डिस्टेंसिंग का नियम लागू कराना था। लेकिन ये गोले भी काम नही आए। भगदड़ मचने पर श्रमिक किसी भी तरह ट्रेन में घुसने की कोशिश करने लगे।