मेरठ
को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल करने की बजाय एक बार फिर
से धोखे की पटकथा तैयार कर दी गई है। इस बाबत लखनऊ में जो बैठक 15 सितंबर
को होनी थी, उसे अचानक 11 सितंबर को तय कर दिया गया। बृहस्पतिवार देर शाम
यह सूचना दी गई कि बैठक में मेरठ के महापौर तथा नगरायुक्त को शुक्रवार को
आना है। धोखाधड़ी की आशंका इसलिए प्रबल हो रही है क्योंकि पहले केंद्र और
राज्य सरकार ने मेरठ के नगरायुक्त को स्मार्ट सिटी की ट्रेनिंग के लिए
अहमदाबाद भेज दिया और फिर बैठक की तारीख अचानक बदलकर कहा कि अब लखनऊ आओ।
यूपी
में तेरहवीं स्मार्ट सिटी रायबरेली बनेगी या मेरठ, इस पर शुक्रवार को
फैसला होने की पूरी संभावना है। मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में 15
सितंबर को होने वाली राज्य उच्चाधिकार संचालन समिति की बैठक अब शुक्रवार को
कर दी गई है। बैठक में नगर विकास विभाग रायबरेली व मेरठ का पूरा ब्यौरा
प्रस्तुत करेगा। वह बताएगा कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के मानक के
अनुसार दोनों शहरों को बराबर-बराबर अंक मिले हैं।
धोखे की पटकथा की गई तैयार
दरअसल,
इस बैठक को अचानक चार दिन पहले करने से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए
हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार से पत्र आया कि अहमदाबाद में स्मार्ट सिटी का
अवलोकन करना है। उसमें नगरायुक्त शिरकत करें। ऐसे में मेरठ के नगरायुक्त
उमेश प्रताप बृहस्पतिवार सुबह वहां के लिए रवाना हो गए हैं। वहां से 14
सितंबर को लौटेेंगे। इधर नगरायुक्त गए और उधर उनके पीआरओ के पास लखनऊ से
फोन कॉल आई कि यह बैठक अब शुक्रवार को है। महापौर और नगरायुक्त को वहां
पूरे साक्ष्य और ब्यौरे के साथ आना होगा। अब नगरायुक्त कैसे लखनऊ बैठक में
पहुंचेंगे। उधर, देर शाम साढ़े सात बजे के बाद सूचना दी गई। ऐसे में महापौर
हरिकांत अहलूवालिया के सामने चुनौती खड़ी हो गई है कि लखनऊ कैसे पहुंचें।
अभी तो तैयारी चल ही रही थी
चूंकि
बैठक 15 को होनी थी तो उसी आधार पर तैयारी की जा रही थी। तैयारी अभी पूरी
ही नहीं है। अहम बात यह है कि दस्तावेज का अवलोकन नगरायुक्त ने ज्यादा किया
है। उनकी स्टडी है। प्रजेंटेशन भी वे ही करते आए हैं। यदि महापौर किसी तरह
पहुंच भी गए तो वे वहां इतनी मजबूती से मेरठ का पक्ष शायद ही रख पाएं।
हालांकि मेयर का कहना है वे हर हाल में लखनऊ पहुंचकर अपना पक्ष रखेंगे।
हर हाल में जाऊंगा बैठक में
मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि मेरठ के साथ साजिश की जा रही है। अब यह बात साफ हो गई है।
पहले नगरायुक्त को अहमदाबाद भेजा और अब कह रहे हैं कि शुक्रवार को ही बैठक
रखी है आ जाओ। रायबरेली के नुमाइंदे तो दो घंटे में पहुंच जाएंगे पर मेरठ
से कैसे लखनऊ पहुंच जाए। रिजर्वेशन 14 सितंबर का कराया था। उसे कैसिल भी
करो तो बड़ी मुश्किल है। फिर भी मैं हर सूरत में लखनऊ पहुंच जाऊंगा। चाहे
मुझे फ्लाइट पकड़नी पड़े या कार से ही जाना पड़े।
यह है स्मार्ट सिटी प्रकरण
केंद्र सरकार देशभर में पहले
चरण में 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना चाहती है। इस
परियोजना में उन्हीं शहरों को शामिल किया जा सकता है जो शहरी विकास
मंत्रालय से निर्धारित 14 मानकों की कसौटी में सर्वोच्च अंक पाएंगे। नगर
विकास विभाग ने मानक के अनुसार 28 शहरों की सूची तैयार की। इसमें
वरीयताक्रम में 14 शहरों का नाम केंद्र सरकार को भेजा था। रायबरेली व मेरठ
को समान अंक 75-75 मिलने पर ए व बी करते हुए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था।
केंद्र ने यूपी से मिले प्रस्ताव के अनुसार 12 शहरों मुरादाबाद, अलीगढ़,
सहारनपुर, बरेली, झांसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा
व रामपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के नामों पर मुहर लगाते
हुए तेरहवें शहर के चयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार को दी है। मुख्य सचिव की
अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।