स्मार्ट कैंट-स्वच्छ कैंट। माल रोड से लेकर कैंट के तमाम इलाकों में लगे चमचमाते बोर्डों पर इसी तरह के स्लोगन लिखे हैं। रात में भी स्वच्छता अभियान चलाकर कूड़ा उठाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। रविवार को अमर उजाला ने कैंट बोर्ड के दावों की हकीकत देखी तो तस्वीर बदरंग नजर आई। कैंट में जगह-जगह कूड़ा पड़ा मिला तो वहीं आबूलेन तक का हाल बदहाल नजर आया।
कैंट को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है, लेकिन हालात सुधर नहीं रहे हैं। आबूलेन की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाई गई तोपें उखड़ चुकी हैं। गमलों में लगाए पौधे कहीं पूरी तरह से गायब हैं तो कहीं पर सूखे पड़े हैं। जो फव्वारा बनाया गया था, वो बंद पड़ा रहता है। लोग फव्वारे को डस्टबिन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सबको लेकर आबूलेन के व्यापारियों से बात हुई तो सबने बस यही कहा कि आबूलेन तक को स्मार्ट नहीं कर पाए तो बाकी इलाके का हाल कैसे बदलेगा।
वहीं कैंट के दूसरे इलाकों की तस्वीर तो ओर भी खराब नजर आई। लालकुर्ती चौराहे के पास सड़क पर पड़ा कूड़ा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा था। जीरो माइल चौराहे पर भी गंदगी सड़क पर पड़ी दिखी। आबू नाला रोड हो या फिर सोफिया चौराहा। सभी जगहों पर हालात बदतर नजर आए। रुड़की रोड पर सोफीपुर सेना फार्म के पास भी बुरा हाल मिला। सड़क पर इतनी गंदगी थी कि मानो महीनों से यहां सफाई नहीं हुई। बाउंड्री रोड टेलीफोन एक्सचेंज के सामने महीनों से बना गड्ढा आज तक नहीं भर पाया है। गड्ढे के आसपास कूड़ा पड़ा है।