37 अरब की ऑनलाइन ठगी सामने आने के बाद सेंट्रल एक्साइज, आयकर विभाग और यूपीएसटीएफ ने सोशल ट्रेडिंग से संबंधित छह दूसरी कंपनियों में भारी गड़बड़ी पाई है। इनमें से दो कंपनियां नोएडा में बीते हफ्ते बंद भी हो गई हैं। जबकि एक कंपनी के मालिक का संबंध शास्त्रीनगर मेरठ निवासी से बताया गया है। विभागीय अधिकारी कंपनी के लोगों के पीछे लगे हैं। पुलिस के साथ भी उनका रिकॉर्ड साझा किया गया है। हालांकि अभी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। लेकिन शिकायत के आधार पर ही एजेंसियां गिरफ्तारी करने की तैयारी में हैं।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार अनुभव मित्तल द्वारा 37 अरब की महाठगी करने के बाद कई दूसरी कंपनियों की भी शिकायतें मिलीं। इन कंपनियों की सूची बनाकर स्क्रूटनी की गई। गहन छानबीन के बाद इनमें से छह कंपनियों में भारी घपला पाया गया है, जो नोएडा व गाजियाबाद के पतों पर नवंबर 2016 के बाद पंजीकृत कराई गई थीं। जांच में सामने आया कि इन कंपनियों में से प्रत्येक का टर्नओवर जनवरी 2017 तक करीब 150 करोड़ रुपये का रहा। चार कंपनियों का पंजीकरण कानपुर सेंट्रल एक्साइज से लिया गया था।
यहां भी मिला वही खेल
जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि ये सभी कंपनियां एक लाख रुपये की कैपिटल वैल्यू पर पंजीकृत हुईं और प्रत्येक से तीन से पांच करोड़ का टैक्स भी जमा किया गया। लेकिन कंपनियों के पास कोई सोर्स ऑफ इनकम नहीं है। ऊपर से कंपनी को पंजीकृत कराते वक्त जो पते दर्ज कराए गए, वे वेरीफिकेशन करने पर फर्जी पाए गए हैं। जिसके बाद कंपनियों के खिलाफ फर्जी डॉक्यूमेंट जमा करने पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
आईटी एक्ट का हुआ उल्लंघन
इन कंपनियों से कुछ ने लाइक कराने के लिए अपने मोबाइल एप बनाए। लेकिन कंपनी में पैसा लगाने वाला ग्राहक किस विज्ञापन को लाइक कर रहा है, यह जानकारी उसके पास नहीं होती है। एजेंसियों ने जांच में पाया कि इन कंपनियों का सर्वर गुड़गांव और चंडीगढ़ जैसे शहरों से संचालित मिला। मोबाइल एप कुछ इस तरह से तैयार किए गए, जिसमें कंपनी के बारे में जानकारी हासिल नहीं की जा सकती है। जबकि आईटी एक्ट के तहत एप का पंजीकरण कराते समय यह सब जानकारी देना जरूरी होता है।
भुगतान भी डेली नहीं
इन तमाम कंपनियों द्वारा पैसों का भुगतान प्रतिदिन के हिसाब से नहीं किया जा रहा। बल्कि एक टारगेट पूरा होने के बाद आप पेटीएम कर सकते हैं या फिर खाते में ट्रांसफर भी। कुछ कंपनियों ने 5 हजार की बिटकॉइन हासिल होने के बाद ही ट्रांसफर करने की सुविधा दी है, तो कुछ कंपनियों ने यह सीमा 5 से 10 हजार रुपये भी रखी है। इसके पीछे कंपनियों ने सोशल ट्रेड व वेबवर्क जैसे कंपनियों की तरह पैकेज भी बनाए हैं। जिनकी कीमत 5 हजार से लेकर 50 हजार के बीच रखी है।