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Meerut News: आसमान चढ़ा भाव, निवेश की चकाचौंध में चमकी चांदी

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वर्ष भर में चांदी की कीमत में तीन गुना अधिक उछाल आया है। चांदी 87, 800 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.70 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे निवेशकों और आर्थिक रणनीतिकारों की नजर चांदी पर है। नौकरी पेशा, व्यापारी, किसान भी चांदी के चढ़ते भाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यही वजह है कि शहर के सराफा बाजार से चांदी गायब हो गई है।
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इंडियन बुलियन ट्रेड कॉरपोरेशन के निदेशक आशुतोष ने बताया कि चालीस साल में कई बार चांदी पर संकट आए। इस संकटों में 1980 में हंट ब्रदर्स और सिल्वर थर्सडे हुआ। सोना चांदी की मंडी कहा जाने वाला मेरठ भी संकट ग्रस्त हुआ। हंट ब्रदर्स ने चांदी की कीमतों को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर चांदी खरीदी। मेरठ में 1970 में चांदी 450 रुपए प्रति किलो थी। 1980 तक यह उच्चतम स्तर 4,700 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। 1981 में चांदी के भाव गिरे तो चांदी 1400 रुपए प्रति किलो रह गई।
यूनाइटेड ज्वैलर्स एंड मैन्युफैक्चर्स फेडरेशन अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि दूसरी बार चांदी के भाव अघोषित रूप से 2008 में वैश्विक शेयर बाजार आर्थिक संकट में बढ़े। 2008 के अंत से 2011 के बीच चांदी के भाव 74 हजार 700 प्रति किलो तक पहुंच गए। 2011 के बाद कीमत घटी तो चांदी के भाव 25 हजार 600 प्रति किलो रह गए। इसके बाद 2024 में वित्तीय संकट के कारण चांदी 87 हजार रुपये से बढ़कर 2025 के अंतिम महीनों में 1 .92 लाख रुपये किलो तक पहुंची। अमेरिका की टैरिफ नीति में ढील के बाद कीमतें 1 .35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गईं। अब अक्तूबर के अंत में चीन ने चांदी निर्यात प्रतिबंधित कर दिया। ऐसे में चांदी का भाव मेरठ सहित देशभर में 2 .70 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गया था। हालांकि सोमवार को चांदी एक बार फिर बेतहाशा गिरी। इस दिन का चांदी का भाव 2.70 लाख प्रति किलो से घटकर 2.45लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है।
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डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि पूर्व में चांदी की कीमतों में परिवर्तन से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। इस बार चांदी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग भी है। 2024 में औद्योगिक क्षेत्र में 29 टन चांदी का प्रयोग हुआ। मेरठ में भी सोलर पैनल, इलेक्ट्रानिक आइटम बनाने में चांदी का प्रयोग तेजी से बढ़ा है।
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