टूट गए किसानों के हौसले, सब कुछ हो गया बर्बाद, सरकार की मदद की उम्मीद
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र के कई गावों में अब गंगा नदी का पानी उतरने लगा है, लेकिन पानी उतरने पर तबाही का मंजर साफ नजर आ रहा है। सड़कें तबाह हो गईं। किसानों की फसलें बर्बाद हों गईं। फसलों को देखकर लोग हताश हैं। अब उन्हें सरकार की मदद की उम्मीद है।
गत दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बादल फटने की घटनाओं के चलते गंगा नदी लंबे समय तक उफान रहीं। बाढ़ ने खादर के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की फसलों को अपनी चपेट में लेकर बर्बाद कर दिया। अब पानी उतर रहा है लेकिन अपने पीछे जो तबाही का मंजर छोड़ गया है उसे देख लोगों की आंखें छलक पड़ती हैं।
पानी आया और कर गया बर्बाद
अब गंगा का पानी तो वापस चला गया पर हमारी जिंदगी को बर्बाद कर गया। करीब 35 बीघा फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। सबसे बड़ी चुनौती जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की है। -किशन चौहान, तारापुर
तीन साल से लगातार बर्बाद हो रही फसल
तीन साल से उनकी तीन एकड़ फसल बर्बाद हो रही है। उनके पास रोजी-रोटी के लिए यही साधन है और जमीन नहीं है। इस बार भी फसल बर्बाद हो गई। अब प्रशासनिक मदद का इंतजार है। -प्रेम सिंह, तारापुर
आर्थिक स्थिति हुई कमजोर
खादर क्षेत्र में आने वाली बाढ़ प्रतिवर्ष हजारों किसानों को बर्बाद कर जाती है जहां उनके खेतों में धान की पक्की फसल खड़ी हुई थी आज उन खेतों में घास जमी हुई है। आर्थिक स्थिति पूरी तरह कमजोर हो गई है। -ओमपाल सिंह, तारापुर
बाढ़ से लड़ते-लड़ते टूट गए हौसले
हर साल बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है। बाढ़ से लड़ना खादर क्षेत्र में अकेले इंसान के बस की बात नहीं है। हर तरफ बस तबाही और बर्बादी है। ऐसा लगता है जैसे हम दशकों पीछे चले गए हैं। -खजान सिंह, तारापुर
ओमपाल सिंह
ओमपाल सिंह
ओमपाल सिंह
ओमपाल सिंह