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ट्रेंड अब सिंगल लेडी ट्रैवल का

Mon, 02 May 2016 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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फाइल फोटो। - फोटो : फाइल फोटो
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शहर से बाहर घूमने के लिए अब लड़कियों को भाई, पति या पापा की जरूरत नहीं होती। अकेले ही वे नदी, जंगल, पहाड़ों से लेकर समंदर तक की सैर कर सकती हैं। कभी शौक के लिए देश घूमती हैं तो कभी कॅरियर के लिए। सफलता के लिए उन्होंने दूसरे शहरों में अकेले जाने से लगने वाले डर को पीछे छोड़ दिया है। आउटडोर टूर पर जाने वाली लड़कियों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ता जा रहा है। शालू अग्रवाल की रिपोर्ट।
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2 साल, 4 समुंदर 10 शहर  
मणिपुर से मेरठ आकर पढ़ाई कर रहीं अजीका दो सालों में 10 आउटडोर टूर कर चुकी हैं। हॉस्टल में रहने वाली अजीका कहती हैं कि फैमिली के सपोर्ट के बिना तो कुछ नहीं होता। कहीं भी जाने से पहले घर पर बताती जरूर हूं। मेरा वर्क लैंडस्केप पर है, इसमें बड़ी आर्टिस्ट बनना चाहती हूं। इसलिए नेचर प्लेस पर जाना पड़ता है। दो साल में 10 शहरों में अकेले टूर पर गई हूं। दो या चार महीने में जब भी टाइम मिलता है घूमने निकल जाती हूं। फंड भी ट्यूशन पढ़ाकर जुटाती हूं। दो सालों में मैंने गुजरात, मुंबई, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, केरल, हिमालय, मेघालय और कोलकाता घूमा है। समुंदर वाले शहरों में ज्यादातर जाती हूं। दिल्ली, गुड़गांव भी गई हूं। अकेले जाना, अकेले रहना शुरू में थोड़ा मुश्किल लगा, अब आदत पड़ गई है।
  
हॉबी और जरूरत है ट्रैवलिंग
फैशन डिजायनर दीपिका पांचाल इन दिनों फोटोग्राफी और मॉडलिंग की तैयारी कर रही हैं। बतौर मॉडल और ड्रेस डिजायनर कॅरियर ग्रूम करने में व्यस्त दीपिका सिंगल गर्ल ट्रैवलर का अच्छा उदाहरण हैं। वह बताती हैं कुछ बनना है तो डर को मन से निकालना पड़ेगा। इसलिए मैंने अकेले घूमना शुरू किया। क्योंकि हर जगह फैमिली साथ नहीं जा सकती। फैशन शो, अपनी बनाई ड्रेस की एग्जीबिशन और कांफ्रेंस के लिए अक्सर बाहर जाना पड़ता है। दिल्ली, नोएडा इसमें प्रमुख हैं। शुरुआत में मम्मी-पापा को आब्जेक्शन था, कि अकेले नहीं जाने देंगे। बाद में उनका सपोर्ट मिला। मॉडलिंग के शो के लिए अक्सर बाहर जाती हूं। देहरादून, शिमला, गुड़गांव, द्वारका, चंडीगढ़, दिल्ली और जयपुर जा चुकी हूं। 
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पहाड़ घूमने के लिए डर को बोला बॉय
फोटोग्राफी की शौकीन करिश्मा सचदेवा क हती हैं मुझे पहाड़ों पर घूमना अच्छा लगता है। बहुत ज्यादा टूर तो नहीं कर पाती, लेकिन साल में एक से दो बार घूमने जरूर जाती हूं, ताकि पहाड़ों की कुछ अच्छी फोटोग्राफ्स क्लिक करके उन्हें एग्जीबिट कर सकूं। आगे बढ़ने के लिए डर को बॉय कहना पड़ता है। मम्मी-पापा को डर तो बहुत लगता है, लेकिन डर से काम नहीं चलता। अभी तक हिमालयन पीक्स, शिवालिक की पहाड़ियों पर जाकर फोटोग्राफी की है।
  
डांस के लिए बनी सिंगल ट्रैवल
राधिका का सपना बिग फेम की कोरियोग्राफर और डांसर बनना है। राधिका कहती हैं जब हमारे सपने बड़े हों तो घर में बैठकर काम नहीं चलता। घर से बाहर निकलना पड़ता है। फैमिली हर जगह आपके साथ नहीं आ सकती, इसलिए मैंने अकेले ही टूरिंग शुरू की। शुरुआत में फैमिली ने मना किया, मगर कॅरियर के कारण उन्होंने हां कर दी। अब तो अक्सर ही डांस कांटेस्ट या शो के लिए बाहर जाती हूं। दिल्ली, मुंबई, पुणे, नोएडा, लखनऊ आदि जगहों पर अकेले जा चुकी हूं।

शौक और काम दोनों ने बढ़ाए गर्ल्स ट्रैवलर्स
ट्रैवलिंग का शौक और स्मार्ट कॅरियर बनाने की चाहत ने फीमेल ट्रैवलर्स की संख्या में इजाफा किया है। गोपाल ट्रैवलर्स के संचालक आकाश खन्ना बताते हैं पिछले कुछ सालों में फीमेल ट्रैवलर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। जो साफ दिखाई देती है। 8-10 फीमेल ग्रुप बनाकर अकेले टूर पर निकल जाती हैं। सब साथ रहती हैं, इसलिए सेफ फील करती हैं। फैमिली भी सपोर्ट करती है। वहीं फोटोग्राफी, पेंटिंग, एनवायरमेंट के अलावा दूसरे क्रिएटिव फील्ड में कॅरियर बनाने की इच्छुक फीमेल भी आउटिंग पर जा रही हैं।
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