प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में ज्ञान भूषण महाराज ससंघ एवं मुनि भाव भूषण महाराज विराजमान हैं। इनके सानिध्य में आषाढ़ अष्टान्हिका महापर्व के शुभ अवसर पर श्री सिद्धच्रक महामंडल विधान का भव्य आयोजन चल रहा है। नंदीश्वरद्वीप जिनालय में जाप्य अनुष्ठान के उपरांत आदर्श जैन द्वारा भगवान का अभिषेक किया गया।
विधान के सातवें दिन शांतिधारा महेश जैन, मनीष प्रसाद जैन, राजीव जैन, विजय कुमार जैन ने की। युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री व पंडित आयुष जैन शास्त्री ने शांतिधारा के महामंत्रों का वाचन किया। आशीष जैन शास्त्री ने बताया कि शांतिधारा करने से आदि, व्याधि, उपाधि सर्व उपद्रवों का नाश होता है।
ज्ञान भूषण महाराज ने मंगल प्रवचन में सिद्धचक्र पूजन की महिमा बताते हुए कहा कि जो इसे जान लेता है, वह मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि अष्टान्हिका पर्व में नंदीश्वर द्वीप के जिनालयों की आराधना करने का सौभाग्य मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आराधना स्वयं निर्मित जिनालयों में होती है, जो किसी द्वारा बनाए नहीं गए हैं। अष्टान्हिका पर्व जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो वर्ष में दो बार आषाढ़ और फाल्गुन के महीनों में आता है। इस दौरान भक्त आठ दिनों तक 24 तीर्थंकरों और नंदीश्वर द्वीप के 52 जिनालयों की पूजा करते हैं। यह पर्व जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।
आचार्य भाव भूषण महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति के लिए प्रेरित किया। विधानाचार्य आयुष जैन शास्त्री ने विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई। अत्यंत सुसज्जित मांगलिक द्रव्यों से अलंकृत सुंदर मांडले पर आज 512 अर्घ्य चढ़ाए। इस मौके पर महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, नवनीत जैन, मुकेश जैन आदि का सहयोग रहा।