श्याम की नटखट मुस्कान का जादू चल गया। सब श्रद्धालु हरे रामा, हरे कृष्णा की धुन पर मग्न हो गए। कलाकारों ने जब कान्हा के बाल रूप की लीलाओं का मंचन किया तो पूरा पंडाल भक्ति में डूब गया। कान्हा ने माखन चुराकर गोपियों को खूब परेशान किया। मां यशोदा के गुस्से को पल भर में शांत कर दिया। यह अद्भुत दृश्य बुधवार को भैसाली मैदान में देखने को मिला। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने नृत्य के जरिये कान्हा के सभी रूपों का सजीव वर्णन कर दिल जीत लिया। उनकी टीम के कलाकारों ने एक के बाद एक करीब ढाई घंटे तक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को बांधे रखा।
इस्कॉन की 50वीं वर्षगांठ और जन्माष्टमी पर आयोजित ‘कृष्ण महोत्सव’ में तीसरे दिन धूम मची। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ब्रज बिहारी कृष्णा की नृत्य प्रस्तुति दी। सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। हरे कृष्णा-हरे कृष्णा बोलते हुए सभी भक्त अपनी सीटों से उठे और नृत्य करने लगे। भैसाली मैदान का दृश्य देखने लायक था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे मानो कृष्ण स्वयं ही रासलीला कर रहे हों।
वृंदावन व मथुरा में हुई बाल लीलाओं को नृत्य के माध्यम से मंचित किया। कालिया मर्दन, गोवर्धन लीला, गोपिका चीरहरण, माखन चोरी और रास लीला को भावों के माध्यम से प्रस्तुत किया। नृत्य में कृष्ण भक्त रसखान और दशरथ की लिखी कविताओं व पदों को संगीतबद्ध कर शामिल किया। ब्रज और हिंदी भाषा से सजी नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकाें को झूमने पर मजबूर कर दिया। संगीतकारों ने उनकी प्रस्तुति को और सजीव कर दिया। नृत्य में संयोजन उनकी साथी इंदिरा का रहा। मल्टी मीडिया शो का भी आयोजन किया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में फूलों से होली खेली।
कार्यक्रम में डीएम जगतराज त्रिपाठी मुख्य अतिथि रहे। उद्घाटन नीरज मित्तल ने किया। अरविंद अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, अशोक गुप्ता, गणेश अग्रवाल, रिकिन अहलूवालिया ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इस मौके पर रमेश चंद गुप्ता, अरविंद गुप्ता, मुकुल जैन, देवेंद्र सिंह सेठी, विश्व योगदास, तरुण गुप्ता, रामकुमार एडवोकेट, राहुल मित्तल मुख्य रहे।
अक्रूर प्रभु ने दिए प्रवचन
इस्कॉन से श्रीमद् गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज के शिष्य अक्रूर प्रभु ने बुधवार को श्रीकृष्ण लीला का सुंदर वर्णन किया। इसकी शुरुआत हरे कृष्ण-हरे कृष्णा नाम की माला से की। सभी भक्त एकजुट होकर अक्रूर प्रभु के साथ माला जपते नजर आए। प्रभु चरणों में लीन होकर नृत्य करने लगे। जिधर देखा उधर ही श्रीकृष्ण भक्त बच्चे, बूढ़े, जवान युवक- युवती और महिला सभी कन्हैया का गुणगान करते नजर आए।
अक्रूर प्रभु ने कहा कि आज से लगभग साढ़े पांच हजार वर्ष पूर्व द्वापर युग में जब पृथ्वी पर असुर राजाओं का भार बहुत बढ़ गया था तो पृथ्वी माता बहुत दुखी मन से गाय के रूप में ब्रह्मा जी के पास गई। प्रार्थना की कि मैं इन नास्तिक असुर राजाओं का बोझ सहन नहीं कर सकती। मेरा भार हटाने के लिए भगवान से प्रार्थना करो। इस प्रकार ब्रह्मा जी क्षीर सागर गए और विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान ने कहा मैं जल्द ही समस्त ऐश्वर्य के साथ पृथ्वी पर आ रहा हूं। भगवान के आने की भूमिका तैयार हुई। मथुरा वासियों को आनंद प्रदान करने के लिए भगवान भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के ठीक बारह बजे देवकी माता के गर्भ से भगवान ने कंस के कारागार में जन्म लिया।
सीडी का विमोचन
इस मौके पर अक्रूर जी महाराज के भजनों की सीडी का विमोचन किया गया। उन्होंने बताया कि सभी भजन कृष्ण को समर्पित हैं।
भैसाली मैदान में आज ये कार्यक्रम
6.00 बजे, तुलसी आरती
6.15 बजे, गौर आरती
6.45 बजे, रॉक बैंड कीर्तन
7.30 बजे, लड्डू गोपाल अभिषेक
9.00 बजे, कृष्ण लीला मल्टी मीडिया शो
10.30 बजे, राधा- कृष्ण अभिषेक
11.30 बजे, फूलों की होली
12 बजे, भगवान की आरती और प्रसाद