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श्रीमद्भागवत कथा है मनुष्य को परमात्मा से मिलाने की राह

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मवाना। नगर में श्रीमद्भागवत कथा 17 से 23 मई तक के लिए आयोजित की गई है। जिसमें विश्व कल्याण व महामारी को दूर करने की प्रार्थना की जा रही है।
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श्री बिबिया वाले मंदिर में मंगलवार को तीसरे दिन महाराज कृष्णा संजय ने माता मदालसा की कथा करते हुए कहा कि माता-पिता का जीवन उच्च आदर्श में गढ़ा होना चाहिए। मदालसा शब्द का अर्थ ही होता है जिसके लिए मद,माया और मोह सब नीरस हो जाता है। मदालसा गंधर्व राज विश्वासु की पुत्री थी। माता मदालसा ने अपने तीनों पुत्रों को ज्ञान, वैराग्य, भक्ति का प्रवचन कर सन्यासी बना दिया। वहीं उन्होंने विदुर नीति विदुर के चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्ञानवान, ज्ञानी, विद्वान कुशल उनकी माता का नाम अंबिका था। जो वेदव्यास जी के आशीर्वाद से उत्पन्न हुए थे। विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री थे। कथा में महाराज ने भगवान विष्णु के कई अवतारों का गुणगान किया। कहा कि जिस प्रकार कमल कीचड़ में होते हुए भी अलिप्त रहता है। वैसे ही हमें इस संसार रूपी कीचड़ में रहते हुए भी अलिप्त रहना चाहिए। इस कलियुग में मनुष्य के लिए एकमात्र आश्रय श्रीमद्भागवत कथा की अमृत धारा है। जो हमें हमारे सारे दुख, दर्द से मुक्त कर हमें उस परमात्मा के चरणों में पहुंचने का सीधा और सरल राह दिखती है।
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