संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने वैदिक संस्कृति के विभिन्न प्रसंगों को भी भावपूर्ण तरीके से सुनाया। हजारों श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
महाराज ने बताया कि भगवान श्रीराम के प्राकट्य पर देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा की थी। उन्होंने कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिए किसी दिखावे की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भाव से किया गया भजन ही भगवान तक पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग है। शांतनु महाराज ने वल्लभाचार्य कृत मधुराष्टकम के माध्यम से भगवान के अलौकिक सौंदर्य का वर्णन किया। उन्होंने नामकरण संस्कार की महत्ता बताते हुए कहा कि बच्चों का नाम संतों और शास्त्रों के मार्गदर्शन में रखना चाहिए। महर्षि वशिष्ठ द्वारा श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नामकरण का प्रसंग भी सुनाया गया।
कथा में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर उपस्थित रहे। अखिल भारतीय अधिकारी स्वयंसेवक संघ के दिनेश सेमवाल, वेदपाल और पूर्व विधायक रविंद्र भड़ाना भी मौजूद थे। भाजपा प्रदेश मंत्री चंद्र मोहन सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग भी कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा आयोजक अजय त्यागी ने सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
संस्कारों और राष्ट्र निर्माण का महत्व
महाराज ने वैदिक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की प्रासंगिकता बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षा तो मिल रही है, लेकिन संस्कारों का अभाव बढ़ रहा है। नए भारत के निर्माण के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि केवल धन अर्जित करने वाली पीढ़ी नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व समझने वाली पीढ़ी तैयार करनी होगी। विश्वामित्र यज्ञ रक्षा प्रसंग से उन्होंने जीवन रूपी यज्ञ की रक्षा के लिए सत्य, त्याग, वैराग्य और समर्पण को आवश्यक बताया। अहिल्या उद्धार प्रसंग के माध्यम से उन्होंने गलतियों को संतों और गुरुजनों के समक्ष स्वीकार करने से व्यक्ति का कल्याण होने की बात कही।
खरखौदा में राम कथा का वाचन करते शांतनु महाराज (संवाद)