महिलाओं के तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तत्काल बाद पहले ही दिन से सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। परिवार परामर्श केंद्र में मंगलवार को चार ऐसे मामलों में सुलह हुई, जिसमें दंपति के बीच तलाक की नौबत आ गई थी। एक दूसरे पर शक और मामूली विवाद पर इनका दांपत्य जीवन टूटने के कगार पर था। हालांकि अभी भी इस तरह के कुछ और मामले पीपीके में विचाराधीन है लेकिन माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन मामलों में भी जल्द सुलह हो जाएगी।
बच्चे छीनकर दी थी तलाक की धमकी
मेरठ में फलावदा निवासी शहाना का दंपति जीवन विवादों से भरा था। उसका आरोप था कि उसके ससुराल वाले उसे परेशान करते हैं। बात बात पर ताने मारते हैं। पति भी उसकी नहीं सुनता है। सास ने उसके दो बच्चे उससे छीनकर घर से निकाल दिया था और अब तलाक की धमकी दे रहे थे। कई महीने से अपने मायके में रह रही थी। ससुराल वालों ने उस पर आरोप लगाए थे। पीपीके में मंगलवार को दंपति में सुलह हो गई। तलाक का इरादा छोड़ उसका शौहर उसे अपने साथ ले गया।
बात बंद हुई और आई तलाक की नौबत
मेरठ में परीक्षितगढ़ की नरगिस का शौहर शादी के बाद सऊदी अरब में नौकरी करने गया था। आरोप है कि पीछे ससुराल वाले खर्चा नहीं देते थे। तंग करते थे। उसने विरोध किया तो उस पर आरोप लगाए गए। गर्भवती हुई तो ससुराल वाले उसे मायके में छोड़ आए। कुछ दिन बाद शौहर ने फोन पर बात करनी भी बंद कर दी। सऊदी से लौटने के बाद भी शौहर ने कई माह बात नहीं की। तलाक की नौबत आ गई थी। पीपीके में मंगलवार को दोनों में सुलह हो गई।
शौहर पर शक से बिगड़ी बात
मेरठ में खरखौदा की परवीन और उसके शौहर के बीच शादी के ढाई साल बाद ही विवाद हो गया। दंपति का एक बच्चा है। परवीन को शक था कि उसके शौहर के दूसरी महिलाओं से संबंध है। इस चक्कर में वह उसे तलाक देकर दूसरी शादी की धमकी दे रहा था। ससुराल वाले भी उसी का पक्ष लेते थे। मंगलवार को दोनों में सुलह हो गई। शौहर अपनी बीवी को साथ ले गया।
शौहर की दूरी से तलाक तक पहुंची बात
मेरठ में किठौर निवासी सायदा का शौहर बंगलूरू में काम करता है। सायदा का आरोप था कि शौहर कई कई महीने घर नहीं आता। उसे अपने शौहर पर अन्य महिलाओं से संबंधों का शक था। उसका आरोप था कि उससे ससुराल वाले बार बार उसे मायके भेज देते हैं। इसी वजह से दंपति में तलाक की नौबत आ गई थी। मंगलवार को सायदा अपने शौहर के साथ चली गई। तय हुआ कि उसका शौहर कुछ दिन उसे बंगलूरू ले जाएगा।
उधर, परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी रेणू सक्सेना ने बताया कि यहां हर सप्ताह करीब तीन से चार केस ऐसे आते हैं। काउंसिलिंग के दौरान पता चलता है कि बेवजह का शक, एक दूसरे पर भरोसे की कमी और मायके और ससुराल वालों का अनावश्यक हस्तक्षेप की वजह से तलाक की नौबत आ जाती है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद तलाक देना इतना आसान नहीं होगा और इस तरह के मामलों में कमी आएगी। विचाराधीन मामलों में भी जल्द सुलह हो जाएगी।