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जिले को खुले में शौच से मुक्त करने पर सवाल

Sat, 04 Nov 2017 11:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ जिले को हाल ही में खुले में शौच से मुक्त घोषित करते हुए पुरस्कृत किया गया है। इसके लिए सूबे के सीएम ने जिलाधिकारी तथा अन्य अधिकारियों को सम्मानित किया है लेकिन उप्र ग्राम पंचायत अधिकारी संघ की जिला इकाई ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि रछौती ही नहीं, जिले के 90 प्रतिशत गांवों में अभी शौचालय नहीं बने हैं। अधिकारियों ने दबाव में जिले को ओडीएफ कराने की घोषणा कराई गई है। संघ पदाधिकारियों के इस दावे को कमिश्नर द्वारा कराई गई गांव रछौती की जांच से भी बल मिलता है। जिसमें पाया कि  444 शौचालयों के लक्ष्य में से यहां केवल 80 शौचालय ही बनाए गए थे।  कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिखकर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
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माछरा ब्लॉक के गांव रछौती कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने शौचालयों की जांच कराई तो पाया कि यहां कुल 444 में से 80 शौचालय ही बनाए गए हैं। इस पर उन्होंने दो अधिकारियों को निलंबित तथा ग्राम  प्रधान समेत  चार केखिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए। इस मामले में उस खलबली मच गई जब किठौर पुलिस ने ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत अधिकारी को थाने बुलवा लिया। हालांकि बातचीत के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

 इस मसले पर उप्र ग्राम पंचायत अधिकारी संघ अध्यक्ष ओंकार नाथ दूबे तथा मंत्री नीरज कुमार आदि पदाधिकारियों की ओर से शुक्रवार को आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने कहा कि इस गांव में मात्र 80 शौचालयों की धनराशि ही मिली है।  उनका निर्माण कर दिया गया। उन्होंने कहा कि केवल रछौती ही नहीं बल्कि अन्य गांवों में भी उच्चाधिकारियों के दबाव में ही ओडीएफ घोषित किया जा रहा है जबकि कुल 482 में से 90 प्रतिशत गांव अभी खुले में शौच से मुक्त नहीं हुए हैं। इतना ही नहीं एक नवंबर को समस्त ग्राम सचिवों की बैठक बुलाकर आंगनबाड़ी एवं प्राइमरी पाठशालाओं में शौचालय निर्माण का दबाव बनाया जा रहा है जबकि वार्षिक कार्ययोजना अप्रैल में ही फीड हो चुकी है। बिना वार्षिक कार्ययोजना के यह काम नहीं हो सकेगा जबकि शौच मुक्त घोषित करने से पूर्व यहां अवश्य शौचालय बन जाने चाहिए थे।
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जब किश्त ही अब मिली तो कैसे बने शौचालय
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि वास्तविकता यह है कि द्वितीय किश्त भी अभी दस दिन पहले ही कुछ पंचायतों को ही मिली है। जब किश्त ही अब  मिली है तो शौचालय कैसे पूरे बनाए जा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों ने अपनी शोहरत व इनाम पाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर अनैतिक दबाव बनाया। दबाव का ही असर रहा कि निर्माण से पूर्व ही एमआईएस फीडिंग करा दी गई जबकि वास्तव में कुछ परिवारों में पहले से ही शौचालय बने हैं। पदाधिकारियों ने मांग की  प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी के खिलाफ एफआईआर का आदेश स्थगित किया जाए अन्यथा ग्राम पंचायत एवं ग्राम विकास अधिकारी दोनों संघों को कार्य बहिष्कार पर बाध्य होना पड़ेगा।

कार्रवाई से प्रधानों में रोष
इस प्रकरण में कार्रवाई के विरोध में शनिवार को राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की बैठक रजपुरा ब्लाक सभागार र्में हुई इसमें ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भी शामिल रहे। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि रछौती के ग्राम प्रधान रमेश चन्द भारती एवं ग्राम पंचायत सचिव विक्रांत त्यागी को बिना रिपोर्ट हुए ही पुलिस थाने ले गई जो घोर आपत्ति का विषय है। दोनों पर लगे आरोप निराधार हैं। ग्राम प्रधान एवं सचिव का कार्य शौचालय बनाकर लाभार्थी को देना है। इसके बाद लाभार्थी उसका किस तरह उपयोग करता है इसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव की नहीं है। संगठन के जिलाध्यक्ष हरेन्द्र सिंह ने कहा कि जो धन मिला उसके शौचालय बना दिए गए। कहा कि दोषी तो वह अधिकारी हैं जिन्होंने जिले को ओडीएफ घोषित कर पदक पाएं हैं। माछरा ब्लॉक अध्यक्ष डा. रविन्द्र कुमार ने कहा कि यदि कार्रवाई रोकने का अश्वासन नहीं मिला तो ग्राम प्रधान भी ग्राम पंचायत सचिवों का समर्थन करते रहेंगे अपने विकास कार्य ठप रखेंगे। बैठक में जिला पंचायत सदस्य डब्बू  ,सुशील कुमार, निरंजन सिंह समेत काफी प्रधान मौजूद रहे।
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