नोट बंदी के बाद आम लोगों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। बैंकों में रुपये बदलने का नंबर नहीं आ रहा। एटीएम से कैश नहीं निकल रहा। घर में थोडे़ बहुत जो खुले रुपये थे, वे सब खर्च हो गए। किसी पर 250 तो किसी पर 50 रुपये ही बचे हैं। इनमें खर्चा कैसे चलाएं। सोते-जागते, हर वक्त इसी की टेंशन सता रही है। शहर में रहकर कोचिंग करने वाले तो इस समस्या से कोचिंग छोड़ बीच में ही घर जाने का मन बना रहे हैं। असर बच्चों की पॉकेट मनी पर भी पड़ा है। बच्चों की टॉफी चॉकलेट और जूस में ही कटौती कर दी गई है। अमर उजाला टीम ने शहरवासियों से उनकी समस्याएं जानीं।
कहां से दिलाएं टॉफी, चॉकलेट
रोजाना भतीजे-भतीजी को घुमाने ले जाता हूं तो टॉफी, चॉकलेट दिलाता था। अब बड़े नोट बंद होने पर छुट्टे की समस्या है। घर में मुश्किल से 400-500 खुले रुपये होंगे। जो इमरजेंसी के लिए हैं। इस सरकार ने तो बच्चों की टॉफी, चॉकलेट भी बंद करा दी। जल्दबाजी में लिया गया फैसला जनता को भारी पड़ रहा है।- लवी सैनी, मलियाना
कोचिंग छोड़ घर लौटना पडे़गा
मेरठ में किराए पर रहकर एसएससी की कोचिंग कर रहा हूं। डेली का करीब 150 रुपये खर्च हो रहा है। अब सिर्फ 50 रुपये बचे हैं। बैंक बंद हैं। एटीएम में कैश नहीं मिला। 500 का नोट कोई लेने को तैयार नहीं। ऐसे में कोचिंग छोड़ घर लौट जाऊंगा।- जावेद मलिक, मुजफ्फरनगर
कहां से लाऊं बुक्स के पैसे
ट्यूशन की फीस जानी है। कुछ बुक्स और नोट्स खरीदने हैं। छुट्टे पैसे खत्म हो गए। पापा कह रहे थे कि एटीएम से 100-100 के नोट निकलेंगे। लेकिन यहां तो एटीएम ही नहीं चल रहा। मानव शर्मा, न्यू मोहनपुरी
हर वक्त यही टेंशन
500 और हजार के नोट बदलने के लिए तीन दिन बैंक की लाइन में लगा। लेकिन नंबर नहीं आया। केवल 250 रुपये बचे हैं। उठते-बैठते यही टेंशन रहती है।- आशीष चौहान, रोहटा रोड
कैसे चलेगा खर्च
डेली 200-250 रुपये का खर्चा है। अब जरूरी खर्च को भी खुले पैसे नहीं है। एटीएम और बैंक बंद हैं। इस सरकार ने तो आफत खड़ी कर दी है।- बीके दुबे, कालका डेंटल कॉलेज
पाई-पाई को परेशान
बड़े नोट बदल नहीं रहे। खुले खर्च हो गए। अब तो पाई-पाई को परेशान हूं। सरकार यह निर्णय लेने से पहले पूरी तैयारी तो करती। लेकिन जल्दबाजी में पब्लिक को परेशान कर दिया।- मंजू सिंह, मोहकमपुर