सरधना। नगर के मोहल्ला छावनी में स्थित विश्व भारती पब्लिक स्कूल परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक शिवम शास्त्री ने अपने ओजस्वी व भावपूर्ण प्रवचनों से भक्तों को आत्मचिंतन और अध्यात्म की गहराइयों में डुबो दिया।
कथावाचक शिवम शास्त्री ने कहा कि जब तक मनुष्य के हृदय में बैठा हुआ अहंकार रूपी कालिया नाग बाहर नहीं निकलता, तब तक उसके जीवन में स्वार्थ, कपट और अन्य विकार दुख का कारण बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि जब तक मनुष्य केवल अपने सुख के लिए प्रकृति का शोषण करता रहेगा, तब तक वास्तविक आनंद प्राप्त नहीं कर सकता। परंतु यदि वह परमार्थ का आश्रय लेकर प्रकृति के संरक्षण और पोषण में योगदान देता है तो वह स्वयं के साथ संपूर्ण जगत को सुखी बना सकता है।
रासलीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि बृज की गोपिकाएं जब वृक्षों और लताओं में कृष्ण को खोजती हैं तो यह प्रकृति और परमात्मा के परम प्रेम रस की स्थिति का प्रतीक है। जिसे महारास कहा गया है। यही स्थिति जीव को परमानंद की अनुभूति कराती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो मनुष्य को जीवन और मृत्यु दोनों के प्रति तटस्थ बनाकर आत्मबोध का मार्ग दिखाती है।
इस दौरान कमलेश, सावित्री, नेहा, अरुणा, अनीता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, पायल, ज्योति, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, विनोद, जयकरण, सुशील, सनी, सतीश, शुभम मौजूद रहे।