अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी
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देवबंद (सहारनपुर)। अयोध्या में श्रीराम का मंदिर और लखनऊ में अमन की मस्जिद का निर्माण किए जाने वाले शिया वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव पर देवबंदी उलमा का कहना है कि जब शिया वक्फ बोर्ड बाबरी मस्जिद के मुकदमे में फरीक ही नहीं है तो वह किस हैसियत से इस तरह के मसौदे तैयार कर रहा है।
मंगलवार को अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि बाबरी मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड के तहत आती है और वो ही इसका मुकदमा लड़ रहा है। शिया वक्फ बोर्ड इस मुकदमे में फरीक नहीं है और न ही उसका बाबरी मस्जिद से कोई मतलब है। इसलिए उसे यह हक नहीं बैठता की वे इस तरह की कोई भी पेशकश करें। उन्होंने कहा कि शरीयत के मुताबिक मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। तमाम मुस्लिम तंजीमे और मुसलमान लीडर यह बात बार बार कह चुके हैं कि इस मामले में कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वो हमें मंजूर होगा। इसके साथ ही मौलाना नदीमुलवाजदी ने यह भी कहा कि 6 दिसंबर के मौके पर कुछ ताकतें इस तरह की खड़ी हो जाती हैं तो हिंदू और मुसलमानों के बीच तनाव पैदा करती हैं। इसलिए सभी को चाहिए कि वह ऐसी ताकतों से होशियार रहें और मुल्क में अमनो अमान के लिए काम करें। ताकि आपसी भाईचारा बना रहे।
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