राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के संयोजक शेर सिंह राणा ने कहा है कि यह पदयात्रा किसी जाति धर्म के खिलाफ नहीं है। यह केंद्र सरकार की उस नीति का विरोध है जिसमें उसने एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दखल दिया है।
यात्रा का सहारनपुर से 13 सितंबर से आगाज करने वाले शेर सिंह राणा शनिवार को मेरठ में थे। मंगल पांडे नगर स्थित कम्यूनिटी हॉल में उन्होंने कहा कि यह यात्रा आगरा तक जाएगी। 16 दिसंबर को गाजियाबाद में इसका समापन होगा। इस मौके पर दस लाख युवाओं की मौजूदगी रहेगी। उन्होंने बताया कि युवाओं को पदयात्रा से जोड़ा जा रहा है। यात्रा शुरू हुए अभी 14 दिन हुए हैं। इसमें पदयात्रा से डेढ़ लाख लोगों को जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा के बाद प्रदेश के युवाओं को जोड़कर एक महापंचायत होगी। जो काले कानून पर सरकार को लोकसभा चुनाव में घेरेगी। शेर सिंह राणा ने कहा कि उनका किसी बिरादरी से कोई भेदभाव नहीं है। उनका मकसद 80 फीसदी जनमानस के खिलाफ पारित किए गए काले कानून को वापस कराना है। उन्होंने बताया कि प्रोन्नति में आरक्षण समाप्त कराने, एससी-एसटी एक्ट में किए बदलाव के कानून को खत्म करने और आरक्षण समाप्त करने की मांगों को लेकर देश के युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था को ही बरकरार रखे ताकि संविधान में दिए गए हर व्यक्ति को सुरक्षा मिल सके।
इसके रूट शहर के भीतर नहीं बल्कि गांव-देहात से है ताकि गांव-गांव के युवाओं को भी इससे जोड़ा जा सके। इसके लिए टीमें बनाकर काम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि स्पष्ट कर दूं कि यह पदयात्रा किसी धर्म या जाति के खिलाफ नहीं बल्कि केंद्र सरकार के एससी-एसटी एक्ट पर रवैये के खिलाफ है। बाद में शनिवार को उन्होंने जनपद के मटौर, दुल्हैड़ा, सिखैड़ा, रसूलपुर पारखी, हर्रा, गोटका, औरंगाबाद आदि गांवों में जनसंपर्क कर लोगों को यात्रा के प्रति जागरूक किया। साथ में युधिष्ठिर सिंह, अमित चौहान, अभिषेक गहलौत, दिनेश गोटका, ललित राणा, लाखन सिंह, साहब सिंह सरपंच आदि ने जनसंपर्क किया।