मेरठ में मिलावटी और जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कार्रवाई में पुलिस की देरी पर मेरठ और बागपत जिले के दो मामलों की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंप दी गई है। ब्यूरो ने मेरठ के जानी थाने और बागपत पुलिस से इससे जुड़ा रिकॉर्ड मांगा है।
सितंबर, 2020 में मेरठ और बागपत जिले में जहरीली शराब पीने से आठ लोगों की मौत हो गई थी। मेरठ के जानी क्षेत्र के मीरपुर जखेड़ा गांव निवासी पवन पुत्र नरपत, जगपाल उर्फ जग्गू, अमित पुत्र भोलेराम व बागपत जनपद में श्यामलाल प्रजापति, सुशील, इस्लामुद्दीन अंसारी, बल्लू और शिव कुमार त्यागी की मौत हुई थी। बावजूद इसके पुलिस ने किसी पर कार्रवाई नहीं की। आबकारी विभाग का रवैया भी टालमटोल का रहा।
अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही शराब माफिया पर शिकंजा कसा जा रहा है। दोनों मामलों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। शराब कांड में लीपापोती करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सुबूत भी तलाशे जा रहे हैं। जानकारी लगते ही दोनों जिलों के पुलिस विभाग में खलबली मच गई है।
शराब कांड पर बखेड़ा और फिर चुप्पी साधी
सितंबर, 2020 में शराब कांड को लेकर जानी क्षेत्र के मीरपुर जखेड़ा गांव में कई दिन तक बखेड़ा चला था। सपा नेता समेत कई लोगों पर मुकदमे भी दर्ज किए गए थे। इस पर पुलिस की किरकिरी हुई थी। मुकदमेबाजी का दौर शुरू हुआ तो विरोधियों ने चुप्पी साध ली और पुलिस ने जांच में लीपापोती कर दी। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की गई थी।