दोनों साथी किसी तरह बाल-बाल बच गए। हादसे के तुरंत बाद 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। हाइड्रा मशीन बुलवाई गई, मगर ट्रॉली की रस्सियां कमजोर होने के कारण शव निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
करीब तीन घंटे बाद, देर रात दो बजे कादिर के शव को ट्रॉली के नीचे से बाहर निकाला गया। शव को रात्रि चार बजे गांव लाया गया, जहां पूरे गांव में मातम छा गया। कादिर अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बच्चों को बेसहारा छोड़ गया है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह परिवार का इकलौता सहारा था और अब पूरे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि कादिर श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूर था, इसलिए सरकार को परिवार के भरण-पोषण के लिए सहायता प्रदान करनी चाहिए।