केस - तीन
मोहल्ला शंकर सौदियान निवासी नवीन भी अपनी एक बेटी, दो बेटों और पत्नी के साथ 2014 में कैराना छोड़कर दिल्ली के सुभाष नगर में जाकर बस गया था। दिल्ली में नवीन ने प्रॉपर्टी का काम किया था, लेकिन धीरे धीरे कस्बे का माहौल बदला। नवीन ने बताया कि 2017 में योगी सरकार आने के बाद कस्बे में सुरक्षा की भावना जगी तो उसने यहां लौटने की हिम्म्त दिखाई और मेढ़की दरवाजे की उनकी दुकान फिर से आबाद हो गई। नवीन के अनुसार अब यहां का माहौल अच्छा है।
सांसद ने उठाया था मुद्दा
कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने 2016 में कस्बे से पलायन का मुद्दा भी जोर शोर से उठाया था। पूरे देश में इसकी गूंज रही। मई 2017 के लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा गूंजा। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया, लेकिन भाजपा फिर भी चुनाव हार गई।
कैराना कस्बे में रंगदारी का दौर तो सदियों पुराना है, लेकिन अगस्त 2014 में एक सप्ताह के अंदर तीन व्यापारियों को रंगदारी ना देने पर मौत के घाट उतार दिया गया। इस वारदात के बाद कस्बे के व्यापारियों में दहशत का आलम इस कदर हावी हुआ कि कई परिवार कस्बे से पलायन कर गए। 2016 में कैराना सांसद रहे हुकुम सिंह ने 346 परिवारों की पलायन सूची जारी कर देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को हथियार बनाया, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता के आगे ये मुद्दा काम नहीं कर सका और भाजपा चुनाव हार गई।
ये हुई थी बड़ी वारदात
दिसंबर 2013 में मुकीम गिरोह ने मूला पंसारी और राजू शंकर सहित चार व्यापारियों को रंगदारी की धमकी मिली थी। चारों को पुलिस सुरक्षा दी गई थी। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान व्यापारियों की सुरक्षा वापस ले ली गई थी। जिसका नतीजा हुआ कि 16 अगस्त को व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष विनोद सिंघल और इसके ठीक 8 दिन बाद 24 अगस्त 2014 को आयरन स्टोर के मालिक व्यापारी भाईयों राजू और शकंर की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। कस्बे ही नहीं पूरे जिले के बाजार कई दिन तक बंद रहे थे। इसके बाद कैराना में रंगदारी मांगने का ऐसा सिलसिला चला कि यहां से लोग पलायन करने को भी मजबूर हुए।
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