फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: शाहजहां ने सहारनपुर में कराया था शाही शिकारगाह का निर्माण, बीमारी के खौफ से छोड़ दिया था क्षेत्र

Wed, 03 Jan 2024 02:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
1 of 4
शिवालिक क्षेत्र में यमुना नगर बना शाहजहां का शाही शिकारगाह, जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है।
मुगल बादशाह शाहजहां ने आगरा में ताजमहल बनवाया था यह तो सभी जानते हैं, लेकिन सहारनपुर में भी शाहजहां का शाही शिकारगाह है इसका कम ही लोगों को पता है। सहारनपुर मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर मिर्जापुर के शिवालिक क्षेत्र में शाहजहां के शाही शिकारगाह के अवशेष अब भी हैं, जिसे बादशाही बाग या बादशाही महल के नाम से जाना जाता है, जो आज खंडहर का रूप ले चुका है।

इस क्षेत्र को वह अपनी राजधानी के तौर पर विकसित करना चाहते थे। अक्सर शिकार के लिए वह यहां पर आते थे। आप भी जानकर हैरान होंगे कि यहां के स्थानीय लोगों को घेंघा रोग से ग्रसित देखकर शाहजहां ने अपना शाही शिकारगाह छोड़ दिया था। इसके बाद वह कभी शाही शिकारगाह में नहीं आए।
विज्ञापन

2 of 4
शाहजहां की शाही शिकारगाह - फोटो : Amar Ujala
1627-1658 के दौरान कराया था निर्माण
दरअसल, बादशाह शाहजहां को कला और संस्कृति से काफी लगाव था। 1627-1658 में शासनकाल के दौरान सहारनपुर के सिद्ध फकीर बाबा लालदास की ख्याति सुनकर शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह दिल्ली से यहां पर आए थे।

उनके बीच में दार्शनिक वार्तालाप हुआ था। बाबा लालदास के दर्शन के बाद वह शिवालिक क्षेत्र में भ्रमण के लिए निकले थे, तभी वहां का अद्भुत नजारा उन्हें भा गया था। गजेटियर ऑफ इंडिया के अनुसार, शासनकाल के दौरान ही शाहजहां ने यमुना नदी के बाएं तट पर इस शाही शिकारगाह का निर्माण कराया था।
विज्ञापन

3 of 4
शाहजहां की शाही शिकारगाह - फोटो : Amar Ujala
शाहजहां ने यहां पर आम का बाग भी लगवाया था, जब भी वह दिल्ली से शिकार के लिए आते थे तो इसी शाही शिकारगाह में आराम फरमाते थे। शिवालिक की तलहटी के सौंदर्य की अलग छटा का नजारा देखने को मिलता है। बेहद ऊंचाई पर होने के कारण यह स्थल किसी हवामहल से कम नहीं है। जो अब पुरातत्व विभाग के अधीन है। सहारनपुर की बादशाही मस्जिद को भी शाहजहां के साथ में संदर्भित किया जाता है।
विज्ञापन

4 of 4
शाहजहां की शाही शिकारगाह - फोटो : Amar Ujala
घेंघा से ग्रसित महिलाओं ने पानी खराब बताया था
शोभित विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी हेरिटेज रिसर्च सेंटर के विरासत समन्वयक यायावर राजीव उपाध्याय का कहना है कि यहां पर किवदंती है कि स्थानीय सामंत नहीं चाहते थे कि इस क्षेत्र में शाहजहां का आधिपत्य हो। तब यहां के सामंतों ने रणनीति बनाई। एक शाम शाहजहां अपनी बेगमों के साथ शाही शिकारगाह में ठहरे हुए थे।

उस समय रणनीति के तहत बेगमों के सामने करीब 15-20 महिलाएं पहुंचीं, जो सभी घेंघा रोग से ग्रसित थीं। जब विचलित होकर बेगमों ने उनसे इस बीमारी के बारे में पूछा तो महिलाओं ने बताया कि पास से यमुना गुजर रही है, जिसका पानी खराब है।

इस पानी को पीने से यहां पर यह बीमारी फैली है। यह देखकर बेगमों ने शाहजहां से मना कर दिया था कि अब यहां नहीं आएंगे। इसके बाद शाहजहां अपनी बेगमों और सैनिकों के साथ यहां से चले गए थे और फिर वापस नहीं आए। गांव जानीपुर निवासी बुजुर्ग नाजिम चौधरी का भी कहना है कि उनके दादा भी अक्सर यही बताया करते थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें