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नक्सली हमले में मेरठ के शहीद की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

Thu, 24 Nov 2016 02:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के उपनिरीक्षक देवेंद्र सिंह बिष्ट को बुधवार सुबह अंतिम विदाई देने के लिए मेरठ में जनसैलाब उमड़ आया। इस दौरान हर आंख में आंसू थे तो दिल में नक्सलियों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। डीएम और एसएसपी समेत सभी अधिकारियों ने शहीद को सलामी दी। छोटे भाई वीरेंद्र ने मुखाग्नि दी।
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सिविल लाइन थानाक्षेत्र के संजय नगर निवासी सीआरपीएफ के एसआई देवेंद्र सिंह बिष्ट छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग फटने से मंगलवार तड़के शहीद हो गए थे। मंगलवार रात करीब 1:35 बजे शहीद का शव उनके घर संजय नगर पहुंचा। जिसके बाद देर रात से ही लोगों का सांत्वना देने के लिए तांता लग गया था। बुधवार सुबह महापौर हरिकांत अहलूवालिया, भाजपा विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना, महानगर अध्यक्ष भाजपा करुणेश नंदन गर्ग, और सिविल लाइन थाना पुलिस संजयनगर पहुंची।
सीआरपीएफ के डीआईजी प्रवीण कुमार, डीएम मेरठ बी. चंद्रकला और एसएसपी जे. रविंदर गौड़ समेत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी शहीद के घर पहुंचे। सुबह नौ बजे शहीद की अंतिम यात्रा में संजयनगर और आसपास के लोगों की भीड़ उमड़ गई। सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर देवेंद्र को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए सीआरपीएफ डीआईजी, डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिविल लाइन, इंस्पेक्टर सिविल लाइन समेत कई पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने अंतिम सलामी दी। उसके बाद देवेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन मौन धारण भी किया गया।
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पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया
सीआरपीएफ, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद देवेंद्र के परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वह उनके परिवार के साथ रहेंगे। केंद्र सरकार से जो भी पीड़ित परिवार के लिए मदद आएगी, उसकी तुरंत जानकारी दी जाएगी। देवेंद्र के शहीद होने पर परिवार की आंखों में आंसू और दिल में गुस्सा था। वहीं, उन्हें गर्व भी था कि देश की खातिर उनका बेटा शहीद हुआ है।

सीएम ने की 25 लाख देने की घोषणा   
मेरठ। शहीद देवेंद्र सिंह बिष्ट के परिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद करने की घोषणा की है। यह जानकारी सपा नेता परविंद्र ईशु ने दी। सपा नेता का कहना है कि वे शहीद परिवार को आर्थिक मदद की मांग के लिए बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री से मिले। आग्रह पर उन्होंने तत्काल शहीद के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

स्कूल में हुई शोक सभा
मेरठ। शहीद देवेंद्र सिंह बिष्ट करन पब्लिक स्कूल के छात्र थे। उनके शहीद होने की सूचना पर बुधवार को करन पब्लिक स्कूल में शोक की लहर दौड़ गई। विद्यालय की निर्देशिका निर्मल सिंह ने शहीद देवेंद्र की आत्मा की शांति के लिए शोक सभा आयोजित की। प्रधानाचार्या ने कहा कि हमें देवेंद्र की शहादत पर गर्व है। ईश्वर शहीद की आत्मा को शांति और परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दे।

पति की शहादत को प्रणाम, देश की करूंगी सेवा   
नक्सली हमले में देवेंद्र सिंह बिष्ट की शहादत के बाद उनकी पत्नी कुमुदी देवी का हौसला नहीं टूटा। कुमुदी ने कहा कि उसके पति तो बहुत बहादुर थे। केंद्र सरकार ने मौका दिया तो वह अपने पति के सपने को पूरा करेगी। वह पति की जगह संभालने के लिए तैयार है। देश के लिए वह अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगी।
नक्सली हमले में देवेंद्र सिंह के शहीद होने पर मेरठ वासियों को जहां गम है तो वहीं उनकी बहादुरी पर गर्व भी है। बुधवार को संजय नगर में मातम छाया रहा। रिश्तेदार और आसपास की महिलाएं देवेंद्र की पत्नी कुमुदी को ढांढस बंधाने में लगे थे। मकान के बाहर बैठे लोग भी देवेंद्र की बहादुरी की चर्चा कर रहे थे।
कुमुदी से ‘अमर उजाला’ ने बातचीत की। कुमुदी ने कहा कि उनके पति अक्सर नक्सलियों के हमले के बारे में बताते रहते थे। उनके चेहरे पर कभी खौफ नहीं दिखा। उनका सपना था नक्सलियों को खत्म करना। जब भी छुट्टी का नाम लेते थे तो देवेंद्र हमेशा यही कहते थे कि मेरे साथी अकेले पड़ जाएंगे। फोन पर अक्सर रोजाना उनसे बातचीत होती थी। कुमुदी बोलीं कि देवेंद्र की तरह मैं भी देश पर जान न्यौछावर करने को तैयार हूं। केंद्र सरकार अगर उनके पति की कमान उनको सौंपेंगी तो वह संभालने को तैयार हैं। कुमुदी की बात सुनकर वहां मौजूद महिलाओं की आंखों में आंसू भर आए। महिलाएं बोलीं कि देवेंद्र की तरह कुमुदी भी बहुत बहादुर है।

असिस्टेंट प्रोफेसर हैं कुमुदी
कुमुदी गंगानगर स्थित आईआईएमटी कॉलेज में इनफार्मा में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। शहीद देवेंद्र सिंह की अंतिम विदाई पर आए सीआरपीएफ के डीआईजी ने परिवार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कुमुदी पोस्ट ग्रेजुएट हैं। परिवार को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार जल्द ही परिवार को नौकरी देगी। जिसकी प्रक्रिया विभाग से कराई जाएगी।

...बेटी तेरा क्या होगा
देवेंद्र की मां भादी देवी का रो रोकर बुरा हाल है। देवेंद्र की शहादत की खबर सुनते ही कुमुदी अपने मायके वालों के साथ मंगलवार रात तीन बजे बंगलूरू से संजय नगर पहुंचीं। उनको देखते ही भादी देवी दौड़कर कुमुदी के गले से लिपट गईं। बोलीं कि बेटी अब तेरा क्या होगा। देवेंद्र हम सबको छोड़कर चला गया। सास-बहू एक-दूसरे से लिपटकर बिलख पड़े। दोनों देवेंद्र के शव के पास ही पूरी रात बैठे रहे।

सिर से उठा पिता का साया
देवेंद्र का डेढ़ साल का बेटा विराज है। जिसे अभी मालूम भी नहीं कि उसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया। विराज बार-बार रोता तो उसे नाना वीर कुमार ही संभालते। दिनभर उसके नाना अपने नाती को खिलाते रहे। विराज को कुमुदी देखती तो फिर बिलख पड़ती।

मार्च में होना था प्रमोशन
पिता भगवान सिंह ने बताया कि देवेंद्र सिंह का मार्च में प्रमोशन होना तय था। देवेंद्र एसआई से इंस्पेक्टर बन जाते और उनका दिल्ली में ट्रांसफर होना बताया गया था। रिश्तेदारों ने छुट्टी लेकर परिवार के साथ बंगलूरू जाने की जिद देवेंद्र से की थी। जिस पर देवेंद्र ने कहा था कि मैं छुट्टी लूंगा तो मेरे साथी कैसे काम करेंगे। सभी छुट्टी ले लेंगे तो देश की सुरक्षा कौन करेगा।

देवेंद्र को मौत खींच ले गई
सीआरपीएफ के एक जवान ने बताया कि देवेंद्र अपने एक साथी की एवज में ऑपरेशन पर गए थे। साथी की अचानक तबियत खराब हो गई थी। देवेंद्र अपने साथ एक जवान को लेकर जंगल में निकले थे। तभी बारूदी सुरंग फट गई थी। जिसमें देवेंद्र शहीद हो गए।
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