फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राईवेट हो या टैक्सी, शहर में इनोवा दिखते ही पुलिस कर रही दबंगई

Thu, 02 Feb 2017 07:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
इनोवा कार
विज्ञापन
दूसरे जिलों से चुनाव ड्यूटी पर आए पुलिस-प्रशासन के अफसरों की डिमांड आम जनता पर भारी पड़ रही है। दरअसल, अधिकतर अफसर दौरे के लिए इनोवा या अन्य लग्जरी गाड़ियां मांग रहे हैं। इसके लिए पुलिस जोर-जबरदस्ती पर उतर आई है। गाड़ी में अकेला ड्राइवर दिखते ही पुलिस उसे पकड़कर सीधे पुलिस लाइन ले जा रही है, चाहे वह प्राइवेट हो या टैक्सी। वहां जबरन चुनाव में ड्यूटी लगाई जा रही है। इसे लेकर पुलिस लाइन में बुधवार को दिनभर हंगामा भी चलता रहा।
विज्ञापन


शहर की सड़कों पर इनोवा या अन्य लग्जरी गाड़ियों से चलना लोगों के लिए मुसीबत साबित हो रहा है। बुधवार को दिन में जहां भी ऐसी गाड़ियां दिखीं, पुलिस उन पर इस तरह टूट पड़ी जैसे गाड़ी किसी आपराधिक वारदात में प्रयुक्त हुई हो। गाड़ी के कागजात लेकर पुलिस उसकी तलाशी में जुटी नजर आई। ड्राइवर जब तक कुछ समझ पाता पुलिस उससे दर्जनों सवाल दाग दिए गए। अगले ही पल कागज लेकर ड्राइवर को गाड़ी के साथ पुलिस लाइन बुला लिया। पुलिस लाइन पहुंचने पर उसे यह पता चलता कि गाड़ी चुनाव ड्यूटी में लगाई जाएगी। यहां पुलिस ड्राइवर को यह समझाती दिखी कि चुनाव के लिए बाहर से वीआईपी आ रहे हैं, जिन्होंने इनोवा जैसी लग्जरी गाड़ियों की डिमांड की है। ड्राइवर पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते दिखे कि उनकी निजी गाड़ी है। चुनाव ड्यूटी में नहीं लगा सकते। इसके बाद भी पुलिस जबरन ड्यूटी में लगा रही है। बता दें कि पहले चरण का मतदान 11 फरवरी को होना है। गाड़ियां भी तब तक के लिए अधिग्रहीत की जा रही हैं।

बेटा बीमार है, उसे लेने जाना है? 
जागृति विहार निवासी अनीस ने बताया कि वह अपनी इनोवा से बुधवार सुबह अपने बेटे को रिश्तेदार के घर से लेने जा रहे थे। तेजगढ़ी चौराहे के पास पुलिस की गाड़ी आई और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया गया। एक पल के लिए तो वह डर गए कि पता नहीं क्या हो गया। पुलिस ने कुछ नहीं पूछा और गाड़ी के कागज ले लिए। पुलिस ने कहा कि पुलिस लाइन आओ। पुलिस लाइन में उन्हें बताया गया कि उनकी गाड़ी चुनाव ड्यूटी में लगेगी। उन्होंने कहा कि बेटा बीमार है, उसे लेने जाना है। इसके बाद भी पुलिस ने नहीं छोड़ा।
विज्ञापन


यह हमारी निजी गाड़ी है
शास्त्रीनगर निवासी अनुज कुमार ने बताया कि पुलिसकर्मी जबरन उनकी इनोवा के कागज छीनकर ले गए। कागज मांगे तो उन्होंने चुनाव में ड्यूटी लगने की बात कह दी। पुलिसकर्मियों ने मेघदूत पुलिया से उन्हें पकड़ा और जबरन कागज छीने थे। उन्होंने बताया कि यह उनकी निजी गाड़ी है। वह सिर्फ अपने परिवार के आने-जाने में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस जबरन उन पर दबाव बना रही है।

ड्राइवर भी दो या खुद आओ
पुलिस की धरपकड़ के दौरान गाड़ी मालिकों ने यह बात रखी कि हमारी गाड़ी प्राइवेट है और इसे खुद हम ही ड्राइव करते हैं। इस पर पुलिस ने कहा कि ड्राइवर की व्यवस्था आपको ही करनी है। ऐसा नहीं कर सकते तो गाड़ी ड्राइव करने के लिए खुद आपको ही आना होगा। 

पुलिस बोली- हम हैं मजबूर
पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे मजबूर हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि गाड़ी कहीं से भी लाओ। चुनाव में बाहर से कुछ बड़े अधिकारी आ रहे हैं, जिन्होंने इनोवा जैसी लग्जरी गाड़ियों की डिमांड की है।

मौलिक अधिकारों का हनन
वरिष्ठ अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग को अलग से खर्च देती है। इस तरह से लोगों की निजी गाड़ियों को अधिग्रहीत करना मौलिक अधिकारों के हनन की श्रेणी में आता है।

- वीआईपी गाड़ियों की जिम्मेदारी आरटीओ की है। अगर कोई पुलिसकर्मी किसी निजी गाड़ी को अधिग्रहीत करता है तो जांच कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जबरन गाड़ी लाने का अधिकार किसी को नहीं है। - आलोक प्रियदर्शी, एसपी सिटी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें