फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शब्बीरपुर कांड: मुआवजे के मामले में केंद्र सरकार ने तलब की रिपोर्ट

Thu, 12 Apr 2018 08:39 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
शब्बीरपुर कांड - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

सहारनपुर में शब्बीरपुर कांड के पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे के मामले में केंद्र सरकार ने रिपोर्ट तलब की है। पीड़ितों को अभी तक मुआवजा न दिए जाने एवं समुचित कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाया गया है।   

विज्ञापन


ग्राम शब्बीरपुर में 5 मई को दलितों के घर जलाए जाने के मामले में उच्च न्यायालय में शब्बीरपुर निवासी मनवीर एवं श्रीकांत ने मुआवजा दिए जाने के मामले में डीएम के खिलाफ अवमानना का वाद दायर किया था। श्रीकांत ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार को ज्ञापन भेजकर एससी, एसटी एक्ट संशोधित अधिनियम के अनुपालन में कार्रवाई कराए जाने की मांग की है। 

आरोप है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित सतर्कता एवं मॉनीटरिंग कमेटी ने एक्ट के प्रावधानों के तहत अनुदान एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई हैं। एक्ट के तहत डकैती, आगजनी एवं जानलेवा हमला के पीड़ितों को सवा आठ लाख रुपये का मुआवजा, जिनके घर जलाए हैं, उनके घर बनवाने, पांच हजार रुपये महीना पेंशन, पीड़ित बच्चों को स्नातक तक की शिक्षा एवं तीन महीने का राशन और कृषि भूमि के पट्टे का प्रावधान है, जबकि डीएम सहारनपुर ने पीड़ितों को एफआईआर के समय मात्र 25 हजार रुपये दिए। आरोप पत्र के बाद कुछ लोगों को 50 हजार रुपये और दिए। जब उन्होंने न्यायालय में एक्ट के तहत मुआवजा दिलाए जाने के लिए वाद दायर किया तो उसके बाद जिलाधिकारी ने 46 में से 35 पीड़ितों को एक ही धारा में अलग-अलग मुआवजा प्रदान किया गया। किसी को 75 हजार तो किसी को सवा दो लाख रुपये दिए। जबकि 11 पीड़ितों को हाईकोर्ट के आदेश पर भी अनुदान नहीं दिया गया। किसी भी व्यक्ति का न तो मकान बनाया गया, न ही पेंशन दी गई, न ही पट्टे मिले और ही बच्चों की उच्च शिक्षा की व्यवस्था की गई। सवा आठ लाख रुपये का अनुदान भी नहीं दिया गया।
विज्ञापन


पढ़ें : सहारनपुर दंगा : आखिर कौन है सहारनपुर हिंसा का गुनहगार ?

विज्ञापन

सहारनपुर हिंसा का फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की उपेक्षा पर पीड़ितों ने डीएम के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की और हाईकोर्ट से डीएम को अवमानना का नोटिस जारी कराया गया। अब पीड़ितों को उत्तर प्रदेश सरकार से 8 फरवरी और 11 अप्रैल 2018 को जिसमें न्याय मंत्रालय भारत सरकार ने यूपी सरकार को और यूपी सरकार ने जिलाधिकारी को एससी, एसटी एक्ट संशोधित अधिनियम का पालन शब्बीरपुर के जातीय दंगों के संबंध कराने के आदेश दिए हैं। यही नहीं एक्ट के मुताबिक न तो पुलिस क्षेत्राधिकारी ने अभी तक 60 दिन के अधिकतम आरोप पत्र दाखिल करने के नियम का पालन किया। हाईकोर्ट में अवमानना के बाद अब भारत सरकार और यूपी सरकार ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए अनुसचिव रविशंकर मिश्र ने शब्बीरपुर पीड़ितों के मुआवजे के मामले में एक सप्ताह में जवाब दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें