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70 साल बीते, नहीं हो सका हस्तिनापुर का विकास

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हस्तिनापुर के नेहरु पार्क में स्थित स्वतंत्रता संग्राम में शहीद सेनानियों का शिलापट। - फोटो : MAWANA
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हस्तिनापुर। प्राचीन ऐतिहासिक भूमि का नाम देश ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है। 6 फरवरी 1949 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने हस्तिनापुर और चंडीगढ़ का शिलान्यास किया था। विकास के मामले में चंडीगढ़ काफी निकल गया और हस्तिनापुर आज भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। बजट में बार-बार घोषणाएं होती रही, लेकिन अभी तक विकास नहीं हुआ।
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हस्तिनापुर के विकास की मांग लगातार संसद में गूंजती रही, लेकिन 70 साल बाद भी हस्तिनापुर में लोग मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहे हैं। क्षेत्रीय जनता चंडीगढ़ की तरह हस्तिनापुर में भी खेल स्टेडियम, डिग्री कॉलेज, कृष्णा सर्किट, रेलवे लाइन, राष्ट्रीय संग्रहालय, बेरोजगार लोगों के लिए उद्योग धंधे आदि की मांग लगातार करती रही है। हालांकि 1 फरवरी को पेश हुए बजट में ऐतिहासिक नगरी के राष्ट्रीय संग्रहालय और कायापलट होने की उम्मीद लोगों में एक बार फिर जागृत हुई है। इस बार लोगों को उम्मीद है कि 70 साल का यह मिथक इस बार टूट जाएगा। ऐतिहासिक नगरी के लोगों को कई बड़ी सौगात मिलेंगी।
यह बोले लोग
विकास से कोसों दूर
चंडीगढ़ के विकास के मुकाबले में हस्तिनापुर अभी भी कोसों दूर है। ऐतिहासिक नगरी को रेलवे लाइन से जोड़ा जाना चाहिए। गोपाल शर्मा, व्यापारी
अभी तक खाली हाथ
ऐतिहासिक नगरी को बार-बार बजट की घोषणा की जाती रही है परंतु अभी तक ऐतिहासिक नगरी के हाथ खाली ही रहे हैं। इस कार कुछ उम्मीद जगी है। -पं. सूर्यकांत शास्त्री
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लगातार कर रहे मांग
विकास के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधियों से लगातार मांग करते आ रहे हैं। इस बार ऐतिहासिक नगरी में जरूर कुछ खास होगा। अभी तक यहां विकास नहीं हुआ। -गौरव गुर्जर
हालत दयनीय
उद्योग धंधे लगने पर ही लोगों को रोजगार मिलेगा। यहां के पर्यटन स्थलों का हाल भी दयनीय है जिन पर सरकार को ध्यान देना होगा। -सोमनाथ पापनेजा, नमामि गंगे के जिला संयोजक

हस्तिनापुर में नेहरु पार्क में स्थित शिलापट। - फोटो : MAWANA

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