जो विद्यार्थी फर्जी पाए गए हैं, उनकी जांच कराई गई तो पता चला कि उनके पिछले प्रमाण पत्र सही नहीं हैं। यानि जिस विद्यालय से उन्होंने से अपने प्रमाण पत्र दर्शाए थे, वहां उनका कोई ब्योरा नहीं निकला है, या जो निकला है, वह गलत तरीके से बनवाया हुआ निकला है। लिहाजा इनकी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि इनमें सबसे ज्यादा आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र के हैं।
नकल माफिया पर कसा शिकंजा
पिछले साल व्यक्तिगत परीक्षार्थियों पर शिकंजा कसा गया था, इस बार व्यक्तिगत के तहत फर्जी परीक्षार्थी नहीं निकले। जो परीक्षार्थी फर्जी पाए गए हैं, वह सब संस्थागत यानि रेग्युलर हैं। इससे नकल माफियाओं पर शिकंजा कसा है।
- राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन, क्षेत्रीय सचिव, यूपी बोर्ड
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