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सात हजार रेग्युलर छात्र फर्जी निकले, नहीं दे सकेंगे परीक्षा 

Thu, 13 Dec 2018 10:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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PCS Examination 2018
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यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 17 जिलों के करीब सात हजार परीक्षार्थी फर्जी निकले हैं। छानबीन केदौरान यह पकड़ में आए हैं। यह इस साल परीक्षा नहीं दे पाएंगे। इनमें करीब चार हजार परीक्षार्थी इंटरमीडिएट के हैं और लगभग तीन हजार परीक्षार्थी हाईस्कूल के। यह रेग्युलर परीक्षार्थी हैं। इन्होंने पिछले क्लास के जो प्रमाण पत्र आवेदन के दौरान थे, वह जांच में सही नहीं पाए गए हैं, जिस कारण इन्हें फर्जी मानते हुए इनका पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। इनमें मेरठ से भी सैकड़ों परीक्षार्थी हैं।

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मेरठ स्थित यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय केअंतर्गत 17 जिले आते हैं। यह जिले हैं आगरा, फिरोजाबादा, मैनपुरी, एटा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, बुलंदशहर, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, सहारनपुर, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर और शामली हैं।

इस साल इन जिलों के व्यक्तिगत (प्राइवेट) परीक्षार्थियों में हाईस्कूल के 5424 हैं, जबकि इंटरमीडिएट में 17 हजार 265 परीक्षार्थी। संस्थागत परीक्षार्थियों की बात करें तो हाईस्कूल में पंच लाख 89 हजार 371 हैं, जबकि इंटरमीडिएट में चार लाख 85 हजार 569 हैं।

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नकलविहीन परीक्षा  संपन्न कराना है मकसद
नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने के मकसद से पिछले दो साल से ज्यादा सख्ती की जा रही है। पिछले साल करीब 18 हजार ऐसे परीक्षार्थी मिले थे। इनमें अधिकांश व्यक्तिगत थे। इस बार इनकी संख्या काफी कम हुई है, मगर यह खास बात यह भी है कि यह सब रेग्युलर यानि संस्थागत वाले हैं।

ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि नकल माफिया पिछली क्लास के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर आवेदन करा देते हैं। पहले इनकी गंभीरता से पड़ताल नहीं होती थी। अब होने लगी है तो यह पकड़ में आने लगे हैं। जैसे 10वीं की परीक्षा देने के लिए नौवीं क्लास के प्रमाण पत्र होने जरूरी हैं। इसी तरह इंटरमीडिएट के लिए 10वीं के प्रमाण पत्र हैं तो एक साल का गैप होना चाहिए या फिर 11वीं के भी प्रमाण पत्र होने चाहिए।
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जो विद्यार्थी फर्जी पाए गए हैं, उनकी जांच कराई गई तो पता चला कि उनके पिछले प्रमाण पत्र सही नहीं हैं। यानि जिस विद्यालय से उन्होंने से अपने प्रमाण पत्र दर्शाए थे, वहां उनका कोई ब्योरा नहीं निकला है, या जो निकला है, वह गलत तरीके से बनवाया हुआ निकला है। लिहाजा इनकी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि इनमें सबसे ज्यादा आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र के हैं।  

नकल माफिया पर कसा शिकंजा
पिछले साल व्यक्तिगत परीक्षार्थियों पर शिकंजा कसा गया था, इस बार व्यक्तिगत के तहत फर्जी परीक्षार्थी नहीं निकले। जो परीक्षार्थी फर्जी पाए गए हैं, वह सब संस्थागत यानि रेग्युलर हैं। इससे नकल माफियाओं पर शिकंजा कसा है। - राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन, क्षेत्रीय सचिव, यूपी बोर्ड

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