हापुड़ रोड से अलीपुर जाने वाले मार्ग पर करीब एक दर्जन मीट फैक्टरियां मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के रडार पर आ गई हैं। यहां रोड बमुश्किल सात मीटर चौड़ी है और इस पर दर्जनों मीट फैक्टरियां बन गईं जिनके नक्शे भी स्वीकृत नहीं हो सकते हैं। चुनाव बाद इन सभी पर एक्शन का प्लान तैयार किया जा रहा है।
अलीपुर क्षेत्र में मीट फैक्टरियां लगातार डेवलेप होती गई हैं। इन सभी में करोड़ों का कारोबार होता है। अधिकतर फैक्टरियों के पास एमडीए से स्वीकृत मानचित्र ही नहीं है। इसके अलावा विभिन्न विभागों की एनओसी भी नहीं है। लेकिन यहां लगातार कटान होता रहा। खास तौर पर अलीपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर हाल बुरा है। यहां फैक्टरियों की भरमार है। इस मार्ग पर कई बड़ी फैक्टरियां हैं। दोनों तरफ खेतों में फैक्टरियां बना दी र्गइं। कई बार यहां मुर्गीदाना बनाने के नाम पर पशु कटान का कारोबार सामने आया।
सर्वे में खुली पोल
हापुड़ रोड से अलीपुर जाने वाला यह मार्ग अधिकतर सात मीटर चौड़ा है। कई जगह तो यह उससे भी कम है। नियमानुसार इतनी कम चौड़ाई के मार्ग पर उद्योग नहीं लगाया जा सकता है। मीट फैक्टरी तो कतई भी नहीं लग सकती है। मेरठ महायोजना 2021 के मुताबिक इस तरह की मीट फैक्टरियों के लिए 18 से 24 मीटर चौड़ा मार्ग चाहिए। यदि मार्ग कम है तो ऐसे भवन का मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता है। बावजूद इसे यहां फैक्टरियां बनीं। हालांकि इनके नक्शे स्वीकृत नहीं हो पाए और अवैध संचालन ही होता रहा। एमडीए अधिकारियों की मिलीभगत से सारा खेल हुआ।
नहीं होगा समायोजन
कई फैक्टरी संचालकों ने नक्शा स्वीकृत करने के लिए यहां आवेदन किए हैं। लेकिन उनके मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकते हैं। शमन शुल्क जमा करने के बावजूद भी ये फैक्टरियां कम से कम सड़क का नियम तो पूरा नहीं करती हैं। इसके अलावा भू उपयोग का पेच भी फंसा है। कई फैक्टरियां कृषि उपयोग की जमीन में बनी हैं।
चुनाव बाद एक्शन
सभी फैक्टरियों की लिस्ट बनाकर चुनाव बाद इन पर एक्शन की तैयारी की जा रही है। वीसी एमडीए राजेश कुमार पांडेय के मुताबिक इसके लिए सर्वे चल रहा है। नियोजन एवं मानचित्र विभाग दोनों की रायशुमारी के बाद यह साफ हुआ है कि यहां स्थित फैक्टरियों के भवन का समायोजन नहीं किया जा सकता है। ऐसे में यहां एक्शन होगा।
नई सरकार बनते ही हुआ था एक्शन
उत्तर प्रदेश में दो साल पहले नई सरकार का गठन हुआ था, तभी यहां व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई थी। साठ अधिकारियों की टीम ने भारी पुलिस बल, पीएसी तथा दंगा नियंत्रण वाहन के साथ आठ फैक्ट्रियों में कार्रवाई की थी। एमडीए ने इन फैक्टरियों पर सील लगाई। छह घंटे की सघन चेकिंग के दौरान टीमों ने यह एक्शन लिया था।
ये मिली थीं खामियां
- पशुपालन विभाग की एनओसी नहीं थी
- रेंडरिंग प्लांट पर किसी तरह का कोई लाइसेंस नहीं
- कच्चा माल लाने का कोई एग्रीमेंट नहीं
- बने माल पर किसी तरह की कोई मुहर नहीं
- प्रदूषण नियंत्रण विभाग की एनओसी नहीं
- मानचित्र स्वीकृत नहीं
- बिजली कनेक्शन के कागज नहीं
- श्रम विभाग संबंधित कोई दस्तावेज नहीं
चुनाव बाद कार्रवाई की तैयारी
नियमों का पालन किया जाएगा। महायोजना के अनुसार 18 से 24 मीटर चौड़ी रोड पर ही फैक्टरी लगाई जा सकती है। हम चुनाव बाद कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। -राजेश कुमार पांडेय, वीसी एमडीए