मेरठ शहर में बढ़ते जल व वायु प्रदूषण को लेकर एनजीटी का कड़ा रुख है। शहर के ऐसे सात बड़े अस्पतालों पर जुर्माना लगाया गया है, जिनके यहां ईटीपी और एसटीपी चालू नहीं थे। इस कारण जल प्रदूषण बढ़ रहा था। इनके अलावा शहर के 100 और अस्पताल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रडार पर है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई होगी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनटीजी के निर्देश पर करीब एक माह पहले शहर के बड़े अस्पतालाें का निरीक्षण किया गया था। इसकी रिपोर्ट बोर्ड मुख्यालय को भेजी गई थी। रिपोर्ट से पता चला कि सात बड़े अस्पतालों में ईटीपी (इक्यूपमेंट ट्रीटमेंट प्लांट) और एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे। इसके बाद इन सात अस्पतालों पर तीन से लेकर चार लाख तक का जुर्माना लगाया गया। इन अस्पतालों से निकलने वाला जल प्रदूषण को बढ़ा रहा था। जल शुद्धीकरण के लिए अस्पतालों में कोई मानक पूरे नहीं किए गए थे।
पहली बार लगाया इतना बड़ा जुर्माना
ऐसा पहली बार हुआ है कि अस्पतालों पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है। संबंधित अस्पतालों के संचालकों में इससे हड़कंप मच गया है और अन्य अस्पतालों के संचालक सचेत हो गए हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माना लखनऊ स्थित बैंक में 15 दिन के अंदर जमा कराना होगा। जुर्माने के लिए अस्पतालों को जारी किए गए पत्र में बैंक की पूरी डिटेल दी गई है।
वर्जन (फोटो)
हमने पूर्व में निरीक्षण किया था, जिसकी रिपोर्ट बोर्ड मुख्यालय को भेजी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। शहर के 100 अन्य अस्पतालों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी चल रही है।
- आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
ये हैं वे सात अस्पताल
1. मेडिकल कालेज
2. एम प्रकाश नर्सिंग होम
3. होप नर्सिंग होम
4. लोकप्रिय अस्पताल
5. मेडविन हॉस्पिटल
6. ओम ट्रॉमा सेंटर
7. आनंद नर्सिंग होम