यह गर्भपात कराने का खेल हो सकता है, लेकिन इसका खुलासा करने में स्वास्थ्य विभाग फेल साबित हो रहा है। दरअसल, शासन की मुखबिर योजना मेरठ में दम तोड़ रही है। दस माह हो गए हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति गर्भ में बेटियों की रक्षा के लिए किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशन के लिए आगे नहीं आया है। एक जुलाई से लागू हो चुकी शासन की ‘मुखबिर योजना’ मेरठ में परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसके तहत एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन दो लाख रुपये खर्च करता है। इसमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाते हैं। जो महिला मिथ्या गर्भवती बनकर सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये दिए जाते हैं। महिला के सहयोगी को 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस योजना केलागू होने के बाद सिर्फ एक बार इस तरह का मामला पकड़ा गया है, वह भी हरियाणा की टीम ने छापामारी कर पकड़ा था।
आशाएं नहीं करतीं मॉनिटरिंग
यह बात सही है कि हर साल काफी संख्या में गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग नहीं हो पाती है। इसकी जिम्मेदारी आशाओं की दी हुई हैं। जिले में करीब 1500 आशाएं हैं, जो गर्भवती महिलाओं की निगरानी करती हैं। बच्चे के जन्म तक वह सब महिलाओं की मॉनिटरिंग नहीं कर पाती हैं। इस कारण इस तरह के आंकड़े सामने आ रहे हैं।- डॉ. राजकुमार, सीएमओ मेरठ
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