मेरठ। प्रह्लादनगर प्रकरण में पलायन को मुद्दा बनाते हुए दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायधीश की बेंच ने कहा कि मकान बेचकर जाना पलायन नहीं है।
प्रह्लादनगर प्रकरण में आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें बिगड़ी कानून व्यवस्था के कारण मेरठ के प्रह्लादनगर सहित शहर के कई अन्य स्थानों से बहुसंख्यकाें के पलायन की बात कही थी। कहा था कि शहर के कई मोहल्ले जो बहुसंख्यक आबादी के थे, वह अब पूरी तरह अल्पसंख्यक बहुल हो चुके हैं। लोग लगातार पलायन कर रहे हैं।
मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। इस पर प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जवाब दाखिल कर कहा था कि मेरठ से कोई पलायन नहीं हुआ है, बल्कि बेहतर सुविधाओं के लिए लोग अपने मकान बेचकर पॉश कालोनियों में शिफ्ट हुए हैं। वैसे भी मकान बेचकर जाना पलायन की श्रेणी में नहीं आता है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता स्वयं न तो इस प्रकरण के पीड़ित हैं और न ही उस स्थान के मूल निवासी हैं। महाधिवक्ता के जवाब के बाद हाईकोर्ट ने भी माना कि प्रह्लादनगर में कोई पलायन नहीं हुआ है। कोर्ट ने यह कहते हुए मकान बेचकर जाना पलायन नहीं है, रिट खारिज कर दी।