मेरठ। एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के चयन को लेकर अपने नियमों में बदलाव किया है। यह नियम इस सीजन से लागू हो जाएंगे, जिसके चलते इस साल होने वाले एशियन गेम्स में क्वालिफाई करना भी एथलीटों के लिए आसान नहीं होगा। अब प्रदर्शन का आधार खिलाड़ी का पुराना रिकॉर्ड के आधार पर नहीं बल्कि वर्तमान में नेशनल और स्टेट मीट में भी बेहतर प्रदर्शन करके दिखाना होगा। अनुभवी हों या नए एथलीट उनके वर्तमान प्रदर्शन को भी देखा जाएगा।
एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्तूबर तक जापान के आइची-नागोया में होंगे। मेरठ से इन गेम्स में कई एथलीटों के भाग लेने की उम्मीद की जा रही है। एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से सीनियर और जूनियर सभी खिलाड़ियों के लिए नेशनल और स्टेट मीट में प्रतिभाग करना आवश्यक कर दिया है। सभी खिलाड़ियों को इन खेलों में प्रदर्शन करके दिखाना होगा। इनमें उनके प्रदर्शन के आधार पर ही उनका एशियन खेलाें में चयन संभव होगा।
दो नेशनल मीट और एक स्टेट मीट में लेना होगा भाग
जिला एथलेटिक संघ के सचिव अनु कुमार ने बताया कि अब सीनियर खिलाड़ियों की मनमानी नहीं चलेगी। एशियन गेम्स की दावेदारी पेश करने वाले खिलाड़ियों को इस सीजन में एशियन गेम्स से पहले दो नेशनल मीट और एक स्टेट मीट में हिस्सा जरूर लेना होगा। साथ ही उनमें बेहतर प्रदर्शन भी करना होगा। पहले सीनियर खिलाड़ी नेशनल या स्टेट मीट में प्रतिभाग नहीं करते थे। पुराने रिकॉर्ड के आधार पर उनका चयन हो जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
मेरठ की अन्नू, पारुल और प्रियंका पर होगा दबाव
मेरठ की बात करें तो मेरठ की स्टार एथलीट धावक पारुल चौधरी, पैदल चाल खिलाड़ी प्रियंका गोस्वामी और भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी पर अधिक दबाव होगा। उन्हें नेशनल मीट में शानदार प्रदर्शन करना होगा। इसके बाद ही एशियन गेम में उन्होंने मौका मिल सकेगा। ऊंची कूद में प्रतिभाग करने वाली ख्याति माथुर, मानसी तोमर, रीत राठौर, धावक रूपल चौधरी पर भी नेशनल और स्टेट मीट में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव होगा। कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के एथलेटिक कोच गौरव त्यागी ने बताया कि एशियन गेम्स सितंबर में है। इससे पहले फरवरी माह में भुवनेश्वर में नेशनल गेम्स, मई में फेडरेशन कप और ओपन नेशनल गेम्स होने हैं। इनमें खिलाड़ियों को अपना बेहतर देना होगा।