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साइंस के शिखर पर बेटियां

Wed, 02 Nov 2016 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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वो जमाना गया जब साइंस में लड़कों का दबदबा रहता था, अब लड़कियों का बोलबाला है। आर्ट साइड के टैग से बाहर निकलकर लड़कियां साइंस की सिरमौर बन रही हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस इस बात का गवाह है। यहां साइंस के विभागों में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वालों में लड़कों से ज्यादा लड़कियां हैं। आर्ट फैकल्टी के कई विषयों में तो वह आगे हैं ही, लेकिन साइंस में उनकी तूती बोल रही है। ट्रेडिशनल कोर्स में छात्राओं का राज है।
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जूलॉजी में सबसे ज्यादा संख्या  
वैसे तो साइंस के सारे विषयों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है लेकिन जूलॉजी विभाग की तस्वीर सबसे अलग है। यहां पीजी कोर्स में कुल 56 विद्यार्थी हैं। जिनमें सिर्फ सात छात्र हैं। 49 छात्राएं हैं। बॉटनी में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। 51 विद्यार्थियों में से 15 छात्र और 36 छात्राएं हैं। केमिस्ट्री में 39 में 18 लड़के और 21 लड़कियां हैं। गणित विषय में भी छात्राओं का गणित बदला है। 44 विद्यार्थियों में 18 लड़के और 26 लड़कियां हैं। साइंस के दूसरे विषयों में भी लड़कियां लड़कों से अधिक हैं। आर्ट की बात करें तो अर्थशास्त्र, अंग्रेजी और एजूकेशन में लड़कियां ज्यादा हैं। मनोविज्ञान विषय में 28 विद्यार्थियों में से 24 लड़कियां हैं।

मेरिट के दम पर एडमिशन
विवि कैंपस में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में एमए और एमएससी में एडमिशन मेरिट के दम पर होता है। एमफिल में एडमिशन के लिए विवि एंट्रेंस कराता है। दोनों ही मामले में लड़कियां लड़कों को पछाड़ रही हैं। कैंपस में ही सर छोटूराम इंस्टीट्यूट में सात ब्रांच में बीटेक होती है। एमसीए और एमबीए भी है। इन कोर्स को छोड़ दिया जाए तो कैंपस में ओवरआल लड़कों से ज्यादा लड़कियां हैं। ट्रेडिशनल कोर्स में तो वह 60 से 70 प्रतिशत तक हैं। बीटेक में सीटों की संख्या अधिक है, इस वजह से छात्राओं को बढ़ा अनुपात उतना नजर नहीं आता।
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कॉलेजों की भी यही हाल
ट्रेडिशनल कोर्स में कॉलेजों का भी यही हाल है। मेरठ के कॉलेजों की बात करें तो डीएन डिग्री कॉलेज और मेरठ कॉलेज में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। शहर में चार गर्ल्स कॉलेज हैं। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कोएड कॉलेजों में यूजी और पीजी कोर्स में लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। प्रोफेशनल कोर्स में लड़कों की संख्या अधिक है।

शिक्षा के बल पर बदलाव
पढ़ाई सबको समान अवसर देती है। लड़कियां मेरिट के दम पर आगे बढ़ रही हैं। यह अच्छी बात है। टीचिंग और रिसर्च के अलावा भी वह दूसरे क्षेत्रों में खुद को साबित कर रही हैं। शिक्षा के बल पर बदलाव होते हैं। यह उसी का नतीजा है। लड़कियां दिखा रही हैं उन्हें मौका मिले तो वह बहुत आगे जा सकती हैं।
- प्रो. एनके तनेजा, कुलपति, सीसीएसयू

पढ़ाई के प्रति गंभीर हैं लड़कियां
एडमिशन मेरिट के आधार पर आता है। बोर्ड की बात हो या पीजी की लड़कियों अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। वह पढ़ाई को लेकर ज्यादा गंभीर हैं। इसका रिजल्ट भी आ रहा है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में लड़कियों को ट्रेडिशनल कोर्स में भेजने का अधिक रुझान है। उन्हें प्रोफेशनल में भी बढ़ाना चाहिए।
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- प्रो. वाई विमला, डीएसडब्ल्यू, सीसीएसयू

विवि कैंपस में छात्र-छात्राओं की संख्या  
विभाग                            कुल           छात्र           छात्राएं
जूलॉजी                           56             7               49
बॉटनी                            51             15             36
केमिस्ट्री                           39              18            21
मैथमेटिक्स                       44              18            26
माइक्रोबायोलॉजी                30               6             24
फिजिक्स                         50             22            28
सांख्यिकी                        40              14            26
एनवायरमेंटल साइंस           13                3             10
अर्थशास्त्र                       38               15            23
अंग्रेजी                          47                15           32
मनोविज्ञान                      28                4             24
बीलिब                          32               15           17
भूगोल                           28               14            14
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