स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फिटनेस जांच को बुलाई गई 1400 स्कूली बसों में से केवल 260 बसें ही पहुंची। आरटीओ ने इतनी कम बसें देखकर कड़ा एतराज जताया और स्कूल संचालकों को अगले चरण में पूरी बसें भेजने को कहा। सुबह से दोपहर तक तकनीकी स्टाफ ने बसों की गहनता से जांच की।
आरटीओ में मेरठ और बागपत जनपद के स्कूलों की करीब 1400 बसे पंजीकृत हैं। इसमें मेरठ जिले के स्कूलों की करीब 950 और बागपत के स्कूलों की करीब 450 बसे हैं। स्कूलों में चल रही खटारा बसों और उससे होने वाली घटनाओं को लेकर अभिभावकों की शिकायतें आरटीओ से लेकर डीएम तक पहुंचती रहती हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने नए सत्र की शुरूआत में ही स्कूल बसों की गहनता के साथ फिटनेस जांच के आदेश आरटीओ को दिए थे।
इस क्रम में परिवहन विभाग ने रविवार को स्कूली बसें आईटीआई साकेत मैदान पर जांच को बुलाई थी। दिए गए समय सुबह आठ बजे की बजाय बसे सुबह 9 बजे पहुंचना शुरू हुई। एक घंटे तक आरटीओ अधिकारी व तकनीकी स्टाफ बसों का इंतजार करते रहे। पहले दिन 1400 बसों में से केवल 20 फीसदी यानि 260 बसे हीं जांच के लिए पहुंची। मौजूद अधिकारियों ने बसों की फिटनेस, परमिट, बीमा आदि के अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मानकों की जांच की। इसमें 250 से कागज तो सही मिले लेकिन 10 बसों के कागज पूरे नहीं मिले। बताया गया कि किसी बस का बीमा टूटा था तो किसी का परमिट अंडर परमिशन था। पहले दिन इतनी कम बस पहुंचने पर आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने कड़ी नाराजगी जताई और सभी स्कूलों को मामले की गंभीरता समझते हुए सभी बसें भेजने को कहा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो बसों को रूट पर पकड़कर सीज किया जाएगा।